सनातन धर्म मंदिर, पंचदेव मंदिर और कैलाश मंदिर में लगी भक्तों की कतार, मांगी मन्नत
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। सावन मास की शिवरात्रि पर मंगलवार को छावनी के सनातन धर्म मंदिर, पंचदेव मंदिर, कैलाश मंदिर में बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारों से गुंजायमान हो उठे। कांवड़ियों और अन्य श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की।
डाक कांवड़, पैदल कांवड़ और बैठी कांवड़ लेकर पहुंचने वाले शिवभक्तों का तांता लगा रहा। दोपहर बाद तक मंदिर में कांवड़ियों और आम श्रद्धालु आते रहे। श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित किए। छावनी के कैलाश मंदिर हाथीखाना में सोमवार शाम से ही दूर-दराज से आने वाले कांवड़ियों का जुटना शुरू हो गया था। कांवड़ियों ने रात में मंदिर परिसर में विश्राम किया।
मंगलवार सुबह साढ़े तीन बजे जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, वातावरण भक्तिमय हो उठा। सुबह चार बजे विशेष आरती के बाद कांवड़ियों ने भोले बाबा का गंगाजल से अभिषेक किया। श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की सेवा के लिए मंदिर समिति एवं समाजसेवियों द्वारा भंडारे का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में टिक्की, फल और खीर का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। भक्तों ने कतारों में लगकर प्रसाद ग्रहण किया।
मन्नत पूरी होने पर लाए कांवड़
हाथीखाना मंदिर पहुंचे कांवड़ियों ने भोले के प्रति अटूट आस्था व्यक्त करते हुए अपने अनुभव साझा किए। शिवपुरी कालोनी निवासी मनप्रीत, सुनील और रंजन ने बताया कि मन्नत पूरी होने के बाद से वे वर्ष 2010 से लगातार गंगाजल ला रहे हैं। वहीं छावनी निवासी आर्यन ने बताया कि मन्नत पूरी होने पर वह हरिद्वार से 70 लीटर गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करने पहुंचे।
चिड़ीमार मोहल्ला निवासी वासु ने बताया कि वे चार साल से कांवड़ ला रहे हैं और इस बार स्टील के कलश में 81 लीटर गंगाजल लाए। सुमित और कुणाल ने बताया कि वह बीते तीन वर्षों से हरिद्वार से बैठी कांवड़ ला रहे। खटीक मंडी निवासी मयंक ने बताया कि पिछले दो वर्षों की तरह इस बार 12 युवकों का समूह कलश कांवड़ लेकर मंदिर में जलाभिषेक के लिए पहुंचा है।
महाकाल के स्वरूप को लेकर मंदिर पहुंची किशोरी। संवाद
महाकाल के स्वरूप को लेकर मंदिर पहुंची किशोरी। संवाद
महाकाल के स्वरूप को लेकर मंदिर पहुंची किशोरी। संवाद
महाकाल के स्वरूप को लेकर मंदिर पहुंची किशोरी। संवाद
महाकाल के स्वरूप को लेकर मंदिर पहुंची किशोरी। संवाद