संवाद न्यूज एजेंसी
शहजादपुर। कस्बे के विकास को नई रफ्तार देने के लिए शहजादपुर में एक बार फिर नगर पालिका के गठन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। करीब साढ़े तीन दशक के लंबे इंतजार के बाद शहजादपुर को फिर से शहरी निकाय का दर्जा मिलने जा रहा है।
सरकार के इस कदम से जहां आधुनिक बुनियादी सुविधाओं की उम्मीदें जगी हैं, वहीं बुजुर्गों के जहन में 80 के दशक का वह दौर भी ताजा हो गया है जब जनता के भारी विरोध के कारण नगर पालिका को भंग करना पड़ा था। शहजादपुर का नगर पालिका से पुराना नाता रहा है। साल 1980 से 1985-86 तक यहां नगर पालिका अस्तित्व में थी। उस वक्त इसे सीधे क्लास ए नगर पालिका का दर्जा दिया गया था।
लेकिन यही दर्जा कस्बे के लोगों के लिए जी का जंजाल बन गया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्लास ए श्रेणी होने के कारण कस्बे पर भारी-भरकम हाउस टैक्स थोप दिया गया था। गलत टैक्स नीति और दुकानों का नक्शा पास करवाने की जटिल प्रक्रियाओं से आम जनता और व्यापारी वर्ग में सरकार के प्रति भारी रोष पनप गया था। भारी हाउस टैक्स के खिलाफ उस समय जनता सड़कों पर उतर आई थी। विरोध इतना बढ़ा कि आखिरकार सरकार को नगर पालिका भंग करने का फैसला लेना पड़ा। हालांकि, पालिका भंग होने के बाद भी चुनावी राह आसान नहीं थी। 1988 में कोर्ट से स्टे मिलने के कारण कस्बे में पंचायत चुनाव नहीं हो सके। कानूनी दांव-पेच सुलझने के बाद 1991 में पहली बार दोबारा पंचायत चुनाव कराए गए।