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Ambala News: खराब टीवी बेचना पड़ा भारी, कंपनी और दुकानदार पर 1.12 लाख का हर्जाना

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- न्यू पालम विहार निवासी पूनम ने एक लाख रुपये में खरीदा था सोनी एलईडी टीवी
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। जिला उपभोक्ता आयोग ने एलईडी टीवी में लगातार आ रही तकनीकी खराबी को लेकर दायर एक शिकायत पर दुकानदार मदान इलेक्ट्रॉनिक्स और सोनी इंडिया कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया है।
आयोग ने कंपनी और विक्रेता को निर्देश दिया है कि वे 45 दिनों में शिकायतकर्ता महिला को या तो नया टीवी बदलकर दें या फिर टीवी की पूरी कीमत एक लाख रुपये वापस करें। साथ ही मानसिक पीड़ा व शारीरिक परेशानी के लिए 7,000 रुपये तथा मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 5,000 रुपये अलग से देने होंगे।
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आदेश का पालन न करने पर शिकायत दाखिल करने की तारीख से 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित राशि चुकानी होगी। हालांकि सेवा केंद्र और कंपनी के क्षेत्रीय बिक्री प्रभारी के खिलाफ दर्ज शिकायत आयोग ने खारिज कर दी। यह फैसला आयोग की अध्यक्ष नीना संधू, सदस्य रूबी शर्मा व विनोद कुमार शर्मा की पीठ ने सुनाया।

टीवी लगते ही सॉफ्टवेयर से जुड़ी दिक्कतें शुरू
मामला न्यू पालम विहार निवासी पूनम मल्होत्रा से जुड़ा है। पूनम ने 3 जनवरी 2024 को मदान इलेक्ट्रॉनिक्स, जगाधरी रोड से एक लाख रुपये में सोनी एलईडी टीवी खरीदा था। इसकी खरीद बजाज फाइनेंस के जरिये फाइनेंस कराई गई थी। शिकायत के अनुसार, टीवी लगते ही उसमें सॉफ्टवेयर से जुड़ी दिक्कतें और टीवी चालू होने में परेशानी शुरू हो गई थी। महिला ने मार्च 2024 में सोनी इंडिया के आधिकारिक ई-मेल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद कंपनी का सर्विस इंजीनियर घर पहुंचा और जॉब शीट में टीवी को ठीक बता दिया गया।
महिला का आरोप था कि टीवी की खराबी उसके बाद भी बनी रही। उन्होंने जुलाई व सितंबर 2024 में टीवी की हालत के वीडियो बनाकर सबूत के तौर पर आयोग में पेश किए। इन वीडियो में टीवी की स्क्रीन पर लगातार लोडिंग सर्कल घूमते दिखना, तस्वीर देर से आना, चैनल के नाम गायब होना और स्क्रीन का अचानक काला पड़ जाना दर्ज था।

कंपनी व दुकानदार की दलील
वहीं सोनी इंडिया और दुकानदार की ओर से दलील दी गई कि 9 मार्च 2024 को तकनीशियन ने टीवी की जांच की थी और जॉब शीट में एनपीएफ-सेट वर्किंग ओके दर्ज कर टीवी को पूरी तरह ठीक बता दिया गया था। कंपनी का कहना था कि इसके बाद महिला ने दोबारा जांच के लिए टीवी दिखाने से इन्कार कर दिया। पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और वीडियो सबूतों की जांच के बाद पाया कि जॉब शीट पर महिला के हस्ताक्षर तक नहीं थे।
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इसके बाद के वीडियो साफ दिखाते हैं कि टीवी में खराबी बरकरार थी। आयोग ने इसे सेवा में कमी करार देते हुए कहा कि एक लाख रुपये में खरीदी गई टीवी का बार-बार खराब होना और कंपनी का उसे स्थायी रूप से ठीक न कर पाना उपभोक्ता के अधिकारों का हनन है।
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