अंबाला। रेलवे ने कर्मचारियों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। रेलवे बोर्ड ने नियम 1802(बी)(1), 1803(बी)(1) और 1804(बी) में संशोधन करते हुए नई गाइडलाइन जारी की है। अब कुछ विशेष परिस्थितियों में सक्षम अधिकारी कर्मचारी के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति आवेदन को मंजूरी देने से इन्कार कर सकेंगे।
रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन करता है, तो निम्नलिखित परिस्थितियों में उसकी अर्जी स्वीकार नहीं की जाएगी- कर्मचारी किसी मामले में निलंबित हो। कर्मचारी के खिलाफ चार्जशीट जारी हो चुकी हो और अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित हो। कर्मचारी के विरुद्ध गंभीर कदाचार से संबंधित न्यायिक कार्यवाही लंबित हो।
न्यायिक कार्यवाही का अर्थ स्पष्ट : रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि न्यायिक कार्यवाही उस स्थिति में लंबित मानी जाएगी, जब किसी पुलिस अधिकारी की शिकायत या रिपोर्ट पर मजिस्ट्रेट संज्ञान ले चुका हो और आपराधिक मुकदमे की प्रक्रिया शुरू हो गई हो।
17 जनवरी 2014 से माना जाएगा प्रभावी : रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (स्थापना) गौरव पुरी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह संशोधन 17 जनवरी 2014 से प्रभावी माना जाएगा। हालांकि, जिन मामलों का निपटारा पहले से लागू नियमों के तहत किया जा चुका है, उन्हें दोबारा खोलने की आवश्यकता नहीं होगी। यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए एडवांस करेक्शन स्लिप नंबर-65 के माध्यम से लागू किया गया है। संवाद