नारायणगढ़। स्थानीय अदालत ने हरियाणा स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन (एचएसडब्ल्यूसी) की ओर से मेसर्स बालाजी राइस मिल के खिलाफ दायर 1 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले को खारिज कर दिया है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास डॉ. जितेन्द्र कुमार की अदालत ने आरोपियों को सभी आरोपों से बरी करते हुए फैसला सुनाया कि निगम ने वास्तविक देनदारी से अधिक राशि के लिए चेक और कानूनी नोटिस जारी किए थे।
हरियाणा स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन ने मैसर्स बालाजी राइस मिल, शहजादपुर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया था कि भारतीय खाद्य निगम और मेसर्स बालाजी राइस मिल के बीच वर्ष 2016-17 के लिए धान की मिलिंग को लेकर एक समझौता हुआ था। निगम का आरोप था कि मिलर्स ने तय समय सीमा के भीतर 293.45 मीट्रिक टन चावल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को नहीं लौटाया। विभाग ने दावा किया कि 10 जनवरी 2018 तक ब्याज और अन्य खर्चों को मिलाकर आरोपियों पर 98,08,414 रुपये की राशि बकाया थी। इस बकाया राशि के भुगतान के लिए मिलर्स की ओर से 50-50 लाख रुपये के दो चेक जारी किए गए थे, जो बैंक में खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गए। यह शिकायत के आधार पर मैसर्स बालाजी राइस मिल से सतीश कुमार और अरुण शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अदालत में कमजोर पड़ा कार्पोरेशन का पक्ष
जिस समय चेक प्रस्तुत किए गए, उस समय बकाया राशि कम थी, जबकि चेक 1 करोड़ रुपये के थे। निगम ने कानूनी नोटिस भी 1 करोड़ रुपये के लिए ही भेजा था, जो कि वास्तविक बकाया राशि से कहीं अधिक था। कोर्ट ने इस नोटिस को अस्पष्ट और दोषपूर्ण माना। विभाग यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी फर्म के कामकाज के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार थे, जो कि धारा 141 के तहत आवश्यक है।