अंबाला। दीपावली बीतने के छह दिन बाद भी वायु प्रदूषण है कि कम होने का नाम नहीं ले रहा। इस वजह से सांस लेने में तो दिक्कत हो रही है। इसके अलावा नागरिक अस्पतालों में अस्थमा और अन्य रोगियों की भीड़ लग रही है। इस कारण अस्पतालों में ओपीडी बढ़ रही है।
इतना ही नहीं दीपावली के बाद से हवा में एक अजीब सा दबाव महसूस किया जा रहा है। लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका प्रमुख कारण वायु प्रदूषण है। आंकड़ों में एक्यूआई भले ही 113 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया जा रहा है मगर हकीकत में यह इससे कई अधिक है। वायु में पीएम 2.5 कणों की मात्रा दोपहर तक काफी बढ़ जाती है।
सुबह छह बजे से दोपहर 12 बजे तक एक्यूआई देखा जाए तो अधिकतम पीएम 2.5 229 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया है। यह वायु प्रदूषण के नारंगी अलर्ट को दिखाता है। जिसमें लोगों को सचेत रहने को कहा जाता है। पीएम 2.5 ही अब लोगों के लिए मुसीबत बन रहा है। इसी वायु प्रदूषण के कारण अस्पताल में सांस के मरीजों की ओपीडी भी सामान्य से अधिक हो गई है।
यह होता है पीएम 2.5
पीएम 2.5 का मतलब है हवा में मौजूद सूक्ष्म कण या पार्टिकुलेट मैटर 2.5। ये कण इतने छोटे होते हैं कि नग्न आंखों से देखा नहीं जा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो पीएम 2.5 कण स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। पीएम 2.5 के कणों का व्यास 2.5 माइक्रोन या उससे कम होता है। ये कण, मानव बाल से करीब 30 गुना छोटे होते हैं। पीएम 2.5 के संपर्क में आने से फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है। इससे अस्थमा और हृदय रोग जैसी बीमारियां भी बढ़ सकती हैं। सांस और हृदय की समस्याओं वाले लोग, बच्चे, और बुजुर्ग, पीएम 2.5 के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। पीएम 2.5 के कण कई स्रोतों से आते हैं, जिसमें बिजली संयंत्र, मोटर वाहन, हवाई जहाज, आवासीय लकड़ी जलाना, जंगल की आग और कृषि अवशेष को जलाना शामिल हैं।
पिछले साल 23 दिन रहा था यलो अलर्ट
अंबाला में वायु प्रदूषण के पिछले साल नवंबर के ग्राफ को देखें तो 23 दिन तक यलो अलर्ट की स्थिति रही थी। जबकि दो नवंबर को एक्यूआई 304 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, तीन और पांच नवंबर को नारंगी अलर्ट रहा था। जबकि वर्ष 2023 के अक्तूबर में नवंबर की स्थिति कुछ ठीक देखी गई थी।
कचरे में आग नहीं हो रही कम
एक तरफ जहां पराली जलाने को लेकर किसानों पर एफआईआर तक दर्ज की जा रही हैं तो वहीं कचरे में आग के मामले में अभी भी लचर व्यवस्था देखने को मिल रहा है। अंबाला छावनी के विभिन्न क्षेत्रों में कचरे में आग लगाई जा रही है। जिससे वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी हो रही है। छावनी की रंगिया मंडी के पास बने चौक पर कचरा आग में जलता दिखाई दिया और लोग वहां से गुजर रहे थे। इसी प्रकार अंबाला सिटी में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है।
सामान्य मरीजों में अधिकतर पीड़ित सांस के
शहर और छावनी के नागरिक अस्पतालों की रोजाना की सामान्य मरीजों की ओपीडी 900 मरीजों से अधिक की है। बीते 10 दिनों में दोनों अस्पतालों में 600 से अधिक मरीज सांस और इससे जुड़ी समस्याओं के आ चुके हैं। शहर के नागरिक अस्पताल में चिकित्सक डॉ. हर्ष बताते हैं कि सामान्य ओपीडी में देखें तो 10 से 20 फीसद मरीज सांस के रोगों से जुड़े आ रहे हैं। रोजाना करीब 150 मरीजों की ओपीडी सांस की बीमारी से जुड़े मरीजों की है। इन लोगों को पहले से ही दमा रोग हैं वह तो उपचार ले ही रहे हैं। वहीं सामान्य मरीजों को वायु प्रदूषण एलर्जी के रूप में नुकसान पहुंचा रहा है। उनमें वायु प्रदूषण के कारण वायरल, सर्दी, खांसी के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। इसमें समाधान यही है कि लोग अगर खुली हवा में जा रहे हैं तो कम से कम मास्क का प्रयोग करें। अगर किसी को सांस लेने में तकलीफ, खांसी या अन्य कोई लक्षण है तो चिकित्सक की सलाह दें।