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रविंद्र ने बमबारी के बीच आठ किमी. सफर किया तय

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यूक्रेन के खारकीव में फंसा मुलाना का रहने वाला रविंद्र जब घर पहुंचा तो रविंद्र की मां जसबीर कौर ने अपने बेटे की आरती उतारी और उसे गले लगाया। वहीं रविन्द्र के पिता कैप्टन राजिंद्र सैनी ने बताया कि हमारी सभी प्रार्थनाएं रंग लाई। रविन्द्र सैनी ने बताया कि जंग के बीच वह खारकीव में पांच दिन बंकर में रहा। हालात बिगड़ते देख बंकर से 1 मार्च को निकला और बमबारी के बीच 8 किलोमीटर पैदल सफर कर मैट्रो स्टेशन पहुंचा। रविंद्र ने इस आठ किलोमीटर के सफर को अपने जीवन के सबसे कठिन सफर बताया।
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रविंद्र ने बताया कि इस पूरे सफर में मेरी जान कभी भी जा सकती थी, लेकिन घर वालों की दुआओं से वह सकुशल घर पहुंच गया। मेट्रो स्टेशन पर भीड़ बहुत थी और यूक्रेन के टीटी ने भारतीयों को धक्के मारे, जबकि यूक्रेनियन को ट्रेन में प्राथमिकता दी जा रही थी, लेकिन जैसे-तैसे रविंद्र ट्रेन में सवार हो गया। जहां से वह 2 मार्च को लवील पहुंचा और वहां से चॉप शहर के लिए टैक्सी ली। टैक्सी वाले ने करीब डेढ़ गुना किराया लिया। चॉप शहर से हंगरी बॉर्डर के लिए निकले, रजिस्ट्रेशन कराया और भीड़ बहुत होने के चलते भारी परेशानियों के बीच बॉर्डर पार किया। हंगरी के बुडापेस्ट पहुंचने पर भारतीय सरकार से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी रविंद्र सहित अन्य छात्रों से मिले। रविंद्र ने बताया कि तीन मार्च को हंगरी से ऑपरेशन गंगा के तहत फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे। रविंद्र ने कहा कि वह एमबीबीएस के चतुर्थ वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। ऐसे में जब भी हालात सही होंगे तो अपनी डिग्री पूरी करने वापस जाएंगे।
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