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1389 किमी प्रति घंटे की गति फिर भी 7 हजार की दूरी तय करने में लगे 48 घंटे

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पांच लड़ाकू विमान करीब 48 घंटे बाद अंबाला पहुंच गए। सवाल यह है कि आखिर 1389 प्रति घंटे की स्पीड से उड़ने वाले राफेल को मात्र सात हजार किलोमीटर की दूरी तय करने में दो दिन कैसे लग गए। दरअसल राफेल सुपरसोनिक स्पीड से उड़ान भरते हैं, लेकिन उनमें ईंधन कम होता है। इसीलिए वे ज्यादा दूरी तय नहीं कर पाते। यही कारण है कि इनमें बार-बार ईंधन डालना पड़ता है, इसीलिए 48 घंटे का समय भी लगा।
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गोल्डन-ऐरोज स्कॉवर्डन हुई जिंदा
अंबाला में ही राफेल फाइटर जेट्स की पहली स्कॉवर्डन में तैनात होगी। 17वीं नंबर की इस स्कॉवार्डन को गोल्डन-ऐरोज नाम दिया गया है। इस स्कॉवड्रन में 18 रफेल लड़ाकू विमान होंगे। तीन ट्रैनर और बाकी 15 फाइटर जेट्स। दरअसल, गोल्डन एरो अभी तक भठिंडा स्थित मिग-21 की स्कॉवार्डन को जाना जाता था। मिग-21 की गोल्डन एरो स्कॉवड्रन ने करगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। मिग-21 के रिटायर होने के बाद ये स्कॉवार्डन पिछले कुछ सालों से बंद पड़ी थी। अब इसे एक बार फिर से राफेल के साथ जीवित कर दिया गया है। पूर्व वायुसेना प्रमुख बी एस धनोआ भी इसी स्कॉवार्डन से ताल्लुक रखते थे।
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