अंबाला सिटी। इंसान के विचारों में अनुभवता होनी चाहिए, विचार सकारात्मक होंगे तो भक्ति करने में भी आनंद आएगा। आनंद की प्राप्ति करने के लिए सभी के विचार भिन्न हो सकते हैं, मगर भगवान की भक्ति का आनंद ही सर्वोपरि माना गया है। उपरोक्त शब्द सिटी के सेक्टर 9 स्थित गेट नंबर तीन के नजदीक श्रीराधा-माधव संकीर्तन पथ व श्रीजी सखी मंडल के तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित रोहित कृष्ण शास्त्री ने कहे।
उन्होंने कहा कि सांसारिक दृष्टि में विचारों का अहम महत्व है। भगवान की प्राप्ति करने के लिए सर्वप्रथम अपने विचारों में संशोधन करने की जरूरत है। जैसे कहा भी गया है कि हम दूसरों से अपने लिए बेहतर अपेक्षाएं रखते हैं, लेकिन हम उनके लिए अपने विचारों में विनम्रता को नहीं दर्शाते। ऐसे में सबसे पहले अपने विचारों का शुद्धिकरण करना होगा, तभी भगवान की भक्ति में आनंद होगा। इस मौके पर पंडित हन्नी शर्मा ने बताया कि कथा में प्रतिदिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। वहीं कथा शाम चार से सात आयोजित की जा रही है। कथा में अंबाला छावनी, मटहेडी, जंडली, प्रेमनगर, यमुनानगर, पंचकूला आदि से पहुंचकर श्रीमद्भागवत महापुराण पर नतमस्तक किया।