अंबाला। सेवा सिमरन सोसायटी इस बार खालसा सृजना दिवस के मौके पर गुरु चरणों में अरदास उपरांत पंजाबी संस्कृति पर आधारित भांगड़े का कार्यक्रम करवाएगी। जिससे कि अपनी विरासत को भूल चुके नौजवान व बच्चे दोबारा इससे जुड़ सकें। यह कार्यक्रम 13 अप्रैल को कैपिटल चौक पर आयोजित किया जाएगा। सुबह 11 से शाम तक यह कार्यक्रम चलेगा। इस कार्यक्रम को लेकर वीरवार को एक अहम बैठक बीसी बाजार स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में संपन्न हुई।
बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि अब सृजना दिवस के मौके पर हमेशा कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा ताकि लोगों को इस दिवस की खासियत पता लग सके कि क्यों इस त्योहार को मनाया जाता है और इसकी भारतीय संस्कृति में क्या मान्यता है।
गुरुद्वारा साहिब के प्रधान ब्रह्मजीत सिंह खालसा ने बताया कि खालसा पंथ के 327 वें खालसा सृजना दिवस के उपलक्ष्य में पंजाबी लोक-संस्कृति पर आधारित भांगड़े का कार्यक्रम किया जाएगा जोकि ढोल की थाप पर होगा। इसके माध्यम से वैसाखी के महत्व को दर्शाया जाएगा। इस उपलक्ष्य में एक विशाल लंगर का भी आयोजन किया जाएगा। वहीं इस खुशी के मौके पर संगत और आमजन का मुंह मीठा करवाने के लिए जलेबी का लंगर भी बरताया जाएगा।
वहीं छोले-कुल्चे का लंगर भी लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि साहिब-ए-कमाल दशमेश पिता अमृत के दाते सरबंस दानी साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने सन: 1699 को वैसाखी वाले दिन पांच प्यारों को तख्त श्री केस गढ़ साहिब आनंदपुर साहिब में खंडे-बाटे की पाहुल देकर सिंह बनाया व एक नया इतिहास रचा था। इसके पश्चात उन्होंने आप पांच प्यारों से खुद अमृत छका और गोबिंद राय से गोबिंद सिंह बने, तभी तो भाई नंद लाल ने कहा है, वह प्रगटियो मर्द अगमड़ा वरियाम अकेला वाहो-वाहो गोविंद सिंह आपे गुर-चेला।