अंबाला शिक्षा सदन के बाहर धरने पर बैठे बर्खास्त पीटीआई शिक्षक।
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अंबाला सिटी। शिक्षा सदन के सामने बैठे पीटीआई (व्यायाम शिक्षक) पिछले करीब 558 दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं। इन व्यायाम शिक्षकों को नौकरी के करीब 10 वर्ष बाद बर्खास्त कर दिया गया था।
धरने पर बैठे बर्खास्त शिक्षक कृष्ण कुमार गुप्ता, शिवानी, जगतार सिंह आदि ने बताया कि सरकारी शिक्षा विभाग में करीब 10 वर्षों से नौकरी करने के बाद पीटीआई बेरोजगार होकर सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि बीते 2010 में 1983 पीटीआई की भर्ती की गई थी। उस दौरान भर्ती में मौजूद अधिकारियों की ओर से भर्ती प्रक्रिया में कुछ कागजी कार्रवाई में खामियां पाई गई थीं।
इस कारण यह मामला हाईकोर्ट में चला गया था। भर्ती प्रक्रिया में कुछ खामियां पाए जाने पश्चात हाई कोर्ट ने करीब 2 वर्ष बाद इस भर्ती को रद्द करने का फैसला सुनाया था। शिक्षकों ने कहा कि इस पूरे मामले पर कार्रवाई उन अधिकारियों के खिलाफ होनी चाहिए थी जिनके कारण भर्ती प्रक्रिया में खामियां पैदा हुई हैं। इस मामले को हरियाणा शारीरिक शिक्षा संघर्ष समिति की ओर से हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। इस मामले की सुनवाई कोर्ट में बहुत लंबी चली और बीते आठ अप्रैल 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसला सुनाया कि इस पीटीआई भर्ती की प्रक्रिया में कुछ खामियां होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। इसी के आधार पर भर्ती रद्द की जाती है। शिक्षकों ने बताया कि अब उनके पास कमाई का कोई साधन नहीं है। सभी बर्खास्त शिक्षक पूरी तरह से सड़क पर आ चुके हैं। अपने परिवारों को पालन पोषण करने में बहुत परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई कर्मचारियों ने अपनी आमदनी के हिसाब से अपने घरों व वाहन आदि के लोन करवाए हुए हैं। जिनकी किस्तें चुकाना उनके लिए मुश्किल हो चुका है।