- स्वास्थ्य विभाग ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत किया बदलाव
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। गर्भवतियों में खून की कमी को देसी नुस्खे से दूर करने पर जोर दिया जा रहा है। जिला नागरिक अस्पतालों में महिला ओपीडी में गर्भवतियों को अब एक माह में तीन नहीं बल्कि चार दिन गुड़ चने का वितरण होगा। हर माह की 9, 10, 23 व माह की आखिरी तारीख में यह वितरण होगा। इसके प्रयोग से शरीर में आयरन सहित कई पोषक तत्वों की पूर्ति होगी। स्वास्थ्य विभाग ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गुड़ व चने के वितरण में एक दिन और शामिल कर दिया गया है। अभियान के दौरान जांच करने पर जिन महिलाओं व बालिकाओं में खून की कमी है उन्हें दवाइयां भी उपलब्ध करवाने का काम किया जा रहा है।
हीमोग्लोबिन शरीर में खून की मात्रा बताता है। पुरुषों में इसकी मात्रा 12 से 16 प्रतिशत तथा महिलाओं में 11 से 14 के बीच होनी चाहिए। एनीमिया तब होता है जब शरीर के रक्त में लाल रक्त कणों या कोशिकाओं के नष्ट होने की दर, उनके निर्माण की दर से अधिक होती है। गर्भवती महिलाओं को बढ़ते शिशु के लिए भी रक्त निर्माण करना पड़ता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को एनीमिया होने की संभावना अधिक रहती है।
ओपीडी में हर 5वीं गर्भवती को एनीमिया की शिकायत
विभाग के अनुसार जिले की महिलाओं में एनीमिया यानी खून की कमी पाई जा रही है तथा प्रत्येक पांचवीं महिला एनीमिया से ग्रस्त है। इसमें शरीर में आयरन सहित कई पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। आयरन की कमी के कारण महिलाओं के खून में हीमोग्लोबिन कम बन रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य व बाल विकास विभाग कैंप लगाकर इनकी जांच कराता है और आयरन (फोलिक एसिड) की गोलियां देता है। इनको दूध, हरी सब्जी और फल खाने की सलाह दी जाती है, जिसको ज्यादातर प्रयोग नहीं करते। इसलिए एनीमिया की पुष्टि होने के बाद महिलाओं और किशोरियों को गुड़ का प्रयोग कराया जा रहा है। अन्य पदार्थों के मुकाबले गुड़ चना सस्ता भी होता है। कैंट व सिटी के नागरिक अस्पताल में रोजाना 600 गर्भवतियों की जांच होती है। पिछले एक माह में 3 हजार में एनीमिया की कमी पाई गई। हालांकि बाद में पूरा किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत एनीमिया की कमी को पूरा करने के लिए एक माह में चार दिन गुड़ व चने का वितरण किया जा रहा है।
- डॉ. राकेश सहल, सीएमओ अंबाला