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वार्षिक फीस पर बवाल, अभिभावकों ने डीईओ पर से किए सवाल

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माई सिटी रिपोर्टर
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अंबाला सिटी। सेसिल कान्वेंट स्कूल में फीस को लेकर अभिभावकों ने मंगलवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमकर बवाल काटा। करीब डेढ़ घंटे तक अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में न केवल रोष प्रकट किया, बल्कि जिला शिक्षा अधिकारी पर एक के बाद एक सवाल दागे। गुस्साए अभिभावकों को शांत करने के लिए डीईओ बस यही आश्वासन देते नजर आए कि हम जांच करवाएंगे।
स्कूल में फीस वृद्धि को लेकर सुबह करीब 11 बजे 40 अभिभावक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर एकजुट हुए। रोष प्रकट करते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पहुंच गए। आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधप बच्चों की पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों से ठगी कर रहा है। उनका कहना था कि बिजनेस तो हम भी करते हैं लेकिन नियम और कानून के तहत। अभिभावकों ने कहा कि हम केवल ट्यूशन फीस ही देंगे वार्षिक चार्ज नहीं देंगे। जब हमारे बच्चे स्कूल में गए ही नहीं तो वार्षिक चार्ज किस बात के लिए दें? स्कूल संचालक एक-एक बच्चे से 13 हजार से लेकर 15 हजार तक वार्षिक फीस मांग रहे हैं जो कि गलत है।
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डीईओ से इस तरह पूछे सवाल
अभिभावक:- डीईओ साहब, हमें तो ज्यादा नॉलेज नहीं है? बस आप बता दें हम सही हैं या स्कूल प्रबंधन
डीईओ:- देखिए मैं मौखिक तौर पर कुछ नहीं बता सकता, जांच के बाद ही कुछ कहूंगा।
प्रश्न - डीईओ साहब, हम 26 को भी आपको शिकायत देकर गए थे, आप यही बता दें कि उस पर क्या किया है आपने?
उत्तर:- उस बारे में स्कूल का आज जवाब आना है, हमने स्कूल से जवाब मांगा हुआ है।
प्रश्न:- क्या स्कूल संचालक वार्षिक चार्ज ले सकते हैं, जबकि आपने लेटर जारी किया था कि केवल ट्यूशन फीस ही ली जा सकती है?
उत्तर: मैं जांच करवाता हूं, जांच के बाद ही कुछ बताऊंगा।
प्रश्न: आप फिर हमें यही बता दें कब तक जांच करवाएंगे, कब आएं आपके पास
उत्तर: मैं लगाता हूं बीईओ की ड्यूटी, जल्दी करवा देंगे
प्रश्न: छह से तो नया सेशन शुरू हो जाएगा, उससे पहले बता दें ताकि बच्चों को दिक्कत न आए?
उत्तर: मैं देखता हूं पांच तक करवा देंगे
अमर उजाला टीम ने डीईओ से सीधे पूछे सवाल
प्रश्न:- आपने सभी, स्कूलों को निर्देश जारी किए थे कि अभिभावकों से केवल ट्यूशन फीस भी वही स्कूल ले सकते हैं जिन्होंने ऑनलाइन कक्षाएं लगाई हों? तो क्या आपके ओदशों का अनुपालन हुआ है?
उत्तर:- जांच के बाद ही कुछ कह पाऊंगा।
हमने 2019-20 में जो फार्म छह भरा था उसमें 40400 रुपये फीस दिखाई गई थी। इस साल हमने 10 प्रतिशत फीस बढ़ाकर 44400 रुपये की है। इसके अलावा तो हम किसी से कुछ नहीं मांग रहे। सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर हैं जो भी बकाया है, वह स्कूल ले सकते हैं। इसके बावजूद हमने अभिभावकों को यह विकल्प दिया है जो कि एक साथ नहीं भर सकते छह किश्तों में 5 अगस्त तक दे दें। किसी बच्चे का हम रिजल्ट नहीं रोक रहे। किसी को क्लास से नहीं निकाल रहे, जिन्हें ट्रांसफर सर्टिफिकेट लेना है तो उन्हें भी यही कहा है कि आप या तो फीस भर दें या शपथ पत्र दे दें। जो गरीब और जरूरतमंद हैं हम तो उनकी सुनवाई के लिए भी तैयार हैं लेकिन हमारे पास ऐसा तो एक भी अभिभावक नहीं आया। - सुधीर बिंदल्स, स्कूल संचालक।
हमने तो लॉकडाउन तक में फीस दी। अब भी मार्च तक की सारी फीस दे चुके हैं। अब स्कूल संचालक वार्षिक चार्ज 13700 रुपये मांग रहे हैं। इसके लिए ऑनलाइन मैसेज भेजे जा रहे हैं, जबकि सरकार ने इसे लेने से मना किया है। - पूजा, अभिभावक।
फीस देने के बाद जब हमारे बच्चों का रिजल्ट लेने का नंबर आया तो स्कूल मनमानी पर उतर गया है। हमसे बोला जा रहा है कि आपके ड्यूज क्लियर नहीं है। - वंदना, अभिभावक।
कारोबार बंद हो गए। सब कुछ डूब गया। फिर भी बच्चे के भविष्य को देखते हुए फीस निरंतर देते रहे, लेकिन अब रिजल्ट की बारी आई तो स्कूल ने साफ कह दिया कि आप अपने बच्चे को निकाल सकते थे। पहले 32 हजार लेते थे अब 40 हजार कर दी। - शीला, अभिभावक।
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हम ट्यूशन फीस पूरे साल की दे चुके हैं, लेकिन अब स्कूल संचालक 14 हजार 700 रुपये वार्षिक चार्ज के रूप में मांग रहे हैं। जब वार्षिक फीस नहीं देने की बात करते हैं तो ट्यूशन फीस ही बढ़ी हुई बता देते हैं। - मीनाक्षी पॉल, अभिभावक।
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