लकवा से पीड़ित मरीजों को लिए राहत भरी खबर है। अब उन्हें तुरंत इलाज के लिए चंडीगढ़ या रोहतक पीजीआई नहीं जाना पड़ेगा। नागरिक अस्पताल में ही उन्हें पीजीआई की तर्ज पर प्रारंभिक उपचार तो मिलेगा ही साथ ही साथ अब थ्रबोंलाइसिस तकनीक यानी टीकाकरण के जरिए मरीजों की जान भी बचाई जा सकेगी। इस टीके की बाजार में न्यूनतम कीमत करीब 40 हजार रुपये है, लेकिन नागरिक अस्पताल में यह टीका एकदम निशुल्क लगाया जाएगा। अंबाला में एक टीका लगा भी दिया गया है।
चिकित्सकों के अनुसार प्रदेश में पहली बार नागरिक अस्पताल में यह सुविधा शुरू हुई है। सिर में खून जमा होने के कारण व्यक्ति को लकवा हो जाता है। यही नहीं देरी होने पर मरीज की मौत होने का भी खतरा रहता था। जिले में इसके इलाज की सुविधा अभी तक नहीं थी, जिससे मरीजों को परेशानी हो रही थी। सीएमओ डॉ. कुलदीप के सहयोग से यह सुविधा शुरू हुई है। इसके अलावा पहली बार अंबाला के नागरिक अस्पताल में आज स्ट्रोक की स्पेशल टीम निरीक्षण करेगी। जिसको लेकर छावनी के नागरिक अस्पताल में दिनभर तैयारियां चलती रहीं। -संवाद
चार घंटे के अंदर लगा टीका तो ही होगा असरदार
थ्रंबोलाइसिस की यह तकनीक लकवा होने के साढ़े चार घंटे तक की जा सकती है। तीव्र स्ट्रोक और लकवाग्रस्त मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी है, ताकि इस टीके का असर 100 प्रतिशत तक हो सके। अगर देरी होती है तो इसका ज्यादा असर नहीं रहता। बता दें कि तीव्र स्ट्रोक या लकवा किसी भी उम्र में हो सकता है। यह 40 साल से कम उम्र के लोगों में भी हो जाता है। भारत में तीव्र स्ट्रोक/लकवा से 10 से 15 प्रतिशत मरीज 40 से कम उम्र के होते हैं। थ्रबोंलाइसिस तकनीक 18 साल से ऊपर के किसी भी मरीज पर की जा सकती है। इस तकनीक का युवा मरीजों पर बहुत अच्छा परिणाम आया है।
ये हैं कारण
- मानसिक तनाव
- अल्कोहल का अधिक सेवन
- क्लीनिकल इंफेक्शन
- धूम्रपान, मोटापा
- उच्च रक्तचाप, मधुमेह
- अनियमित दिनचर्या
दिमाग तक रक्त पहुंचने में रुकावट
जब दिमाग तक रक्त पहुंचने में रुकावट आ जाती है। उस जगह की दिमागी कोशिकाएं मरने लगती हैं, क्योंकि उन्हें काम करने के लिए जो ऑक्सीजन और पोषण मिलना चाहिए, वो नहीं मिल पाता। इस स्थिति में शरीर का कोई भी भाग काम करना बंद कर देता है और कुछ समय के बाद अपने आप ठीक हो जाता है। अचानक से शरीर में बहुत तेज दर्द होना। आंख के आगे कुछ पल के लिए अंधेरा छा जाना, बोलने में कभी अचानक से लड़खड़ा जाना, सुबह जागने के बाद अचानक ऐसा लगे की हाथ काम नहीं कर रहा है, तो ये स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं।
सुरिंद्र को लगा छावनी नागरिक अस्पताल में लगा पहला टीका
बब्याल निवासी 58 वर्षीय सुरिंद्र छावनी के नागरिक अस्पताल में उपचार लेने वाला पहला मरीज बना। 26 फरवरी को यह मरीज तबीयत बिगड़ने पर दाखिल हुआ था। इमरजेंसी के अंदर आए इस मरीज के बारे में फिजिशियन डॉ. संजीव गोयल को पता लगा तो कुछ दिन बाद ही उपचार के लिए पहले सीटी स्कैन करवाया। उसमें पता लगाया कि नस बंद है या फिर फटी हुई है। अगर नस फट जाती है तो उसका उपचार चंडीगढ़ पीजीआई में ही है। नस बंद होने पर उन्होंने अल्टेप्लास नामक इंजेक्शन लगाने का निर्णय लिया। इस दौरान डॉ. संजीव गोयल के साथ डॉ. चित्रा, सीनियर स्टाफ नर्स बाला सुंदरी, सोनिया व सीमा ने मिलकर उपचार किया। इस इंजेक्शन से खून के थक्कों को घुलाने का काम किया जाता है। हालांकि बाद में मरीज को पीजीआई रेफर कर दिया।
लकवा का उपचार अब नागरिक अस्पताल में भी मिलेगा। हजारों रुपये की लागत से आने वाले टीके के जरिए मरीज का उपचार किया जाएगा। बब्याल के सुरिंद्र को यह टीका लगाया जा चुका है और काफी असरदार भी रहा। पहले केवल पीजीआई चंडीगढ़ में ही इसका उपचार होता था।
- डॉ.राकेश सहल, पीएमओ, अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल