जिला नागरिक अस्पताल में मंगलवार शाम 15 मिनट ऑक्सीजन के बड़े सिलिंडर देरी से पहुंचे। इसी कारण करीब 15 मिनट उपचाराधीन कुछ मरीजों की सांसों पर संकट आ गया। हैरत की बात तो यह है कि उस समय अस्पताल में ऑक्सीजन गैस के छोटे सिलिंडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध थे। अब यह छोटे सिलिंडर समय रहते क्यों नहीं लगाए गए इस सवाल का जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है। वहीं, इसी दौरान एक मरीज के साथ आया तीमारदार डॉक्टर से रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने की जिद्द करने लगा। इस पर डॉक्टर ने कहा कि इन्हें रेमडेसिविर की आवश्यकता नहीं है। इस पर मरीज के साथ आए तीमारदार ने जमकर हंगामा किया और अभद्रता की।
परिजनों ने लगाए आरोप खुद कंधों पर उठाकर लाने पड़ रहे सिलिंडर
केस नंबर 1
इस दौरान चरखी मोहल्ले निवासी पूर्णचंद ने बताया कि मेरे पिता रामफेरे अस्पताल में उपचारधीन हैं। ऑक्सीजन गैस सिलिंडर खत्म हो गया था। करीब 15-20 मिनट गैस सिलिंडर देरी से मिला। मैं खुद अपने कंधे पर सिलिंडर उठाकर लेकर आया। जब सिलिंडर लेकर पहुंचा तो मेरे पिता की नाक से खून आ रहा था। मैंने स्टाफ से कहा कि सिलिंडर लगा दो तो उन्होंने कहा कि तुम अपने आप लगाओ, लेकिन मैं तो मजदूरी का काम करता हूं। मुझे सिलिंडर लगाना नहीं आता। मेरे पास कुछ भी नहीं है। डॉ. कहते हैं कि फिल्टर पानी पिलाओ, लेकिन बोतल बंद पानी पिलाने के लिए मेरे पास पैसे नहीं हैं। इसीलिए टूंटी से पानी-भरकर लाना पड़ता है।
केस नंबर दो
वार्ड 10 की गुरप्रीत कौर का ऑक्सीजन गैस सिलिंडर भी खत्म हो गया। बेटी भावना ने बताया कि करीब 10 मिनट सिलिंडर नहीं मिला। इसके बाद उसने वार्ड पार्षद मिथुन वर्मा को फोन किया। वर्मा अपने पिता देवेंद्र वर्मा के साथ तुरंत नागरिक अस्पताल पहुंचे। मिथुन वर्मा ने बताया कि जब सिविल सर्जन को फोन किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। उसके बाद नोडल अधिकारी डॉ. सुखप्रीत को फोन किया, लेकिन उनका फोन बंद आया। मिथुन ने बताया कि हमने एसडीएम को फोन किया। एसडीएम सचिन गुप्ता मौके पर पहुंचे। उन्होंने डॉ. सुखप्रीत सिंह से बातचीत की और डॉ. सुखप्रीत ने उन्हें सारी स्थिति से अवगत करवाते हुए बताया कि अस्पताल में सिलिंडर की कोई कमी ही नहीं है।
केस नंबर : 03
सेक्टर-9 निवासी पुनीत शर्मा ने बताया कि 15 मिनट ऑक्सीजन नहीं मिली। ऑक्सीजन के सिलिंडर नहीं आए थे। फिर कुछ नेता आए थे उन्होंने फोन किए तब जाकर सिलिंडर आए। अंदर देखने के लिए कोई भी विशेषज्ञ डॉ. नहीं है। हमें खुद सिलिंडर उठाकर लाने पड़ रहे हैं। करीब पौने चार बजे सिलिंडर आए। फेफड़ों में दिक्कत हो जाए तो कोई देखने वाला नहीं है। यह कहते हैं कि 24 घंटे डॉक्टर रहते हैं लेकिन यहां कोई नहीं रहता। मरीज के साथ आने वालों को यह तक नहीं बताया जाता कि मरीज को कौन ही दवा दी जा रही है।
केस नंबर : 04
अंबाला शहर के दीपक ने बताया कि करीब 20-25 मिनट ऑक्सीजन देरी से आई। हमने जब बात की तो स्टाफ ने बताया कि हमने एक बजे से सिलिंडर मंगवाए हुए हैं और ऑक्सीजन के सिलिंडर की गाड़ी आ रही है, लेकिन सिलिंडर करीब चार बजे मिले। इसी कारण कुछ दिक्कत आई।
केस नंबर : 05
बड़ागढ़ से आए जसविंद्र सिंह ने बताया कि मेरे पिता यहां भर्ती हैं। करीब 15-20 मिनट ऑक्सीजन नहीं मिली। समय से पहले ही हमें स्टाफ को अवगत करवा दिया था। जब हमने बात की तो बताया गया कि गाड़ी आ रही है। यह करते करीब आधा घंटा इस तरह निकल गया था।
ऑक्सीजन की हमारे पास कोई कमी नहीं है। हां करीब 15 मिनट देरी से बड़े सिलिंडर आए, लेकिन हमारे पास उस दौरान छोटे सिलिंडर पर्याप्त मात्रा में थे। बिना बात के परिजनों ने हंगामा किया। लोग जानबूझकर आफत उतार रहे हैं। कोरोना आइसोलेशन वार्ड में भीड़ जुटा रहे हैं। उन्हें निकलने के लिए कहा तो उन्होंने विरोध किया। उन्हें यह नहीं पता कि कोरोना संक्रमित मरीज के साथ लेटने और उनके पास बैठने से उन्हें भी कोरोना हो सकता है।
- डॉ. संतलाल वर्मा, पीएमओ अंबाला जिला नागरिक अस्पताल।