अंबाला। मालिकाना हक हासिल करने वाले 375 दुकानदारों के लिए बुरी खबर है। नगर परिषद ने इन दुकानदारों की फाइल को अमान्य करार दिया है। इसलिए अब इन दुकानदारों को दुकानों का मालिकाना हक नहीं मिलेगा।
यह फैसला दुकानों से संबंधित फाइलों के आकलन के बाद किया है। 400 दुकानदारों की दुकानों से संबंधित रजिस्ट्री हो गई है और अब वे दुकानों के मालिक बन गए हैं। जबकि कुछ दुकानदारों ने मालिक बनते हुए दुकान के ऊपर के हिस्से को तैयार करना शुरु कर दिया है।
दस्तावेजों में खामी
नगर परिषद के सचिव राजेश कुमार ने बताया कि जिन 375 दुकानों को योजना के तहत अमान्य करार दिया है। उनके दस्तावेजों में काफी खामियां थीं। कुछ दुकानदारों के पास दुकान से संबंधित असली रसीद नहीं थी तो कुछ के पास जो रसीद थीं। उन पर आवेदन करने वाले व्यक्ति की जगह किसी दूसरे का नाम अंकित था। वहीं दुकानों के दस साल से अधिक के मालिकों के नाम में भी खामी थी। वहीं, कुछ दुकानें ऐसी थीं, जिनके एक नहीं बल्कि चार से पांच मालिक थे, यानी की एक दुकान के चार से पांच मालिक हैं और वो भी अधूरे कागजों में।
तहबाजारी की दुकानों का आकलन शुरु
नगर परिषद ने तहबाजारी की दुकानों के दस्तावेजों का भी आकलन शुरू कर दिया है। मालिकाना हक के लिए नगर परिषद के किराए की रसीद का मिलान किया जा रहा है। इसके आधार पर दुकान के मालिक का निर्धारण किया जाएगा। लगभग 20 से अधिक फाइलों पर नगर परिषद ने काम शुरू कर दिया है, उम्मीद है कि जल्द ही इनके मालिकाना हक को लेकर नोटिस जारी कर दिया जाएगा।
एक हजार के करीब दुकानें
नगर परिषद में 850 के करीब दुकानें और 150 तहबाजारी के तहत खोखे बने हुए हैं। सरकार की मालिकाना हक की योजना के तहत प्राथमिक चरण में दुकानदारों ने आवेदन किया था। दूसरे चरण में तहबाजारी के दुकानदारों को शामिल किया गया था। हालांकि अभी भी सवा सौ के करीब दुकानों के मालिकाना हक की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इन्हें पैसे जमा कराने के नोटिस जारी कर दिए जाएंगे।
वर्जन
सरकार की मालिकाना हक की योजना पर पूरी गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। 400 के करीब दुकानदारों को दुकानों का मालिकाना हक मिल चुका है। वहीं तहबाजारी के कुछ मामले भी मालिकाना हक के तहत शामिल किए हैं। जल्द ही इनके नोटिस जारी कर दिए जाएंगे।
देवेंद्र नरवाल, कार्यकारी अभियंता, नप सदर, अंबाला।
अंबाला छावनी में इंदिरा पार्क के साथ मालिकाना हक योजना के तहत दुकानदारों को सौंपी गई दुकानें। स