अंबाला। दिव्यांगता को मात देकर स्केटिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तांशू चमक बिखेर रहा है। मूकबधिर होने के बावजूद तांशू अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन चुका है। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 30 से अधिक पदक जीतकर अंबाला का नाम रोशन कर रहा है।
स्केटिंग कोच और स्कूल शिक्षक चंद्रहास शर्मा उसे प्रशिक्षित कर रहे हैं। तांशू के पदकों की बात करें तो वर्ष 2020 में स्वीडन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्पेशल ओलंपिक प्रतियोगिता में स्पीड आइस स्केटिंग में 500 और 333 मीटर में देश के लिए दो स्वर्ण पदक जीते। इसके दो साल बाद तांशू का चयन 2022 में रूस में होने वाली आइस स्केटिंग के लिए हुआ लेकिन कोरोनाकाल के चलते वह रूस नहीं जा सका।
शुरू में नहीं पता लगी बेटे की विशेषता
तांशू की माता रजनी ने बताया कि उनका बेटा विशेष है। इसलिए वह स्पेशल बच्चों के साथ पढ़ता और खेलता-कूदता है। तांशू का जन्म 2005 में हुआ था। पांच साल तक उन्हें पता ही नहीं चला कि वह स्पेशल है। पांच साल के बाद मालूम हुआ कि तांशू सामान्य बच्चों की तरह नहीं है। इसके बाद उन्होंने तांशू को वात्सल्य स्कूल में भेजना शुरू कर दिया। तांशू की उम्र जब छह साल थी तब उसके पिता की मृत्यु हो गई । तांशू का एक छोटा भाई भी है। दोनों बेटों की जिम्मेदारी मां रजनी के ऊपर आ गई। इसके बाद मां ने दोनों बेटों के पालन-पोषण के लिए चाय बेचना शुरू किया। वह पिछले कई साल से अंबाला छावनी के सदर बाजार में चाय की दुकान चला रही हैं। तांशू की शिक्षा वात्सल्य स्कूल से हुई है। तांशू की स्केटिंग में प्रतिभा देखकर कैंटोनबोर्ड बोर्ड ने वात्सल्य स्कूल में प्रैक्टिस के लिए रिंग बनवा दिया। इसके बाद बोर्ड ने तांशू की स्पीड को देखते हुए उसे स्पेशल प्रशिक्षण के लिए गुरुग्राम भेजा। जहां पर तांशू ने स्केटिंग की बारीकी सीखी।