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छह हजार से अधिक आबादी पर सिर्फ एक डॉक्टर

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जिले में डॉक्टरों की कमी मरीजों की सेहत पर भारी पड़ रही है। जबकि डॉक्टरों पर भी लगातार दबाव बढ़ रहा है। कुल स्वीकृत पदों में से कई पद अभी तक रिक्त पड़े हैं। जबकि स्वास्थ्य महकमे के मुख्य चिकित्सा अधिकारी का दावा है कि जल्द ही नए डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी।
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जिला में जनसंख्या लगातार बढ़ रही। देखा जाए तो स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से यहां कई सुविधाओं में विस्तार तो हुआ है। मगर डॉक्टरों की उपलब्धता की बात करें तो जिले की करीब बारह लाख से अधिक की आबादी के तहत यहां छह हजार से अधिक लोगों पर केवल एक ही सरकारी डॉक्टर उपलब्ध है।
जिले में नागरिक अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी समेत अन्य कुल 35 स्वास्थ्य संस्थानों में कुल 257 डॉक्टरों के पदों को स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 199 पदों पर डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जबकि 58 सीट अभी भी खाली हैं। इसमें सबसे अधिक डॉक्टरों की कमी नागरिक अस्पताल नारायणगढ़ में हैं। यहां कुल स्वीकृत पदों में से 20 डॉक्टर कम हैं।
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इसके अलावा नागरिक अस्पताल अंबाला कैंट में 12 तो सिटी सिविल अस्पताल में कुल स्वीकृत पदों में से 9 डॉक्टर कम हैं। वहीं अंबाला सिटी के ट्रामा सेंटर में तो 10 डॉक्टरों के पद में से केवल 2 ही डॉक्टर तैनात हैं। जो कि आने वाले संभावित कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। वहीं सीएचसी शहजादपुर और सीएचसी मुलाना की बात करें तो यहां पर्याप्त डॉक्टर मौजूद हैं। इसके साथ ही एक-एक अतिरिक्त डॉक्टर भी तैनात किया गया है। जो डॉक्टर अस्पताल में तैनात है, उनमें से बहुत से डॉक्टरों पर अस्पताल की व्यवस्था संभालने व कागजी कार्यवाही करने का भी जिम्मा है। इस कारण वह मरीजों को देखने के स्थान पर अधिकतर समय कागजी कार्यवाही में ही निकाल देते हैं। वहीं, जहां पर चार डॉक्टरों की जरूरत है, वहां पर केवल एक डॉक्टर तैनात है। जो कि प्रतिदिन ओपीडी में क्षमता से अधिक मरीजों को देख रहे हैं। इससे डॉक्टरों पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। संवाद
सीएचसी में तैनात है डॉक्टर
सीएचसी और पीएचसी की बात करें तो यहां अधिकतर में डॉक्टर तैनात है, वहीं दो सीएचसी तो ऐसे भी है जहां पर अतिरिक्त डॉक्टर भी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा आईसीडीएस अंबाला में 1, स्कूल हेल्थ में 1, पॉलीक्लिनिक में 2, टीबी अस्पताल में 2, पुलिस अस्पताल में 1, एचएपी अंबाला में 1, सेंट्रल जेल में 1, आरडी बलदेव नगर में 1 डॉक्टर की तैैनाती है। वहीं पीपी सेंटर अंबाला में 2 व सेंट्रल जेल में 2 डॉक्टर के पद खाली हैं।
नारायणगढ़ से रेफर होते हैं अधिकतर मरीज
जिला अस्पताल नारायणगढ़ में स्वीकृत पदों में से 20 डॉक्टर कम है। इस कारण वहां से हादसे से जुड़े व अन्य मरीजों को शहर के नागरिक अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। इस कारण मरीजों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यहां तक कि डेंगू के भी बहुत से मरीजों को शहर के नागरिक अस्पताल में ही रेफर कर दिया गया था, इस कारण मरीज व उनके परिजनों को करीब 45 किलोमीटर का सफर तक कर आना पड़ता था और वह बहुत परेशान हुए थे।
ट्रामा सेंटर में भी डॉक्टर कम
ट्रामा सेंटर अंबाला सिटी में 10 डॉक्टरों के पद स्वीकृत किए गए हैं। इसमें से केवल दो डॉक्टर ही तैनात है। इस कारण ओपीडी वाले डॉक्टरों को इस ट्रामा सेंटर में लगाया जाता है। वहीं, इसी वजह से स्टाफ नर्सों पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है। इस समय आठ डॉक्टरों की ट्रामा सेंटर में कमी चल रही है।
पूरे प्रदेश में करीब एक हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि जनवरी तक अंबाला को नए डॉक्टर मिल जाएंगे। इससे पहले सितंबर 2020 तक नए डॉक्टर आते रहे हैं। हम मरीजों की सुविधाआें को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं।
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-डॉ. कुलदीप सिंह, सीएमओ अंबाला
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