शहर में श्री रघुनाथ मंदिर चल रही भगवद्गीता एवं श्रीमद् भागवत समारोह के दौरान प्रवचन करते स्वामी
अंबाला सिटी। नावल्टी रोड स्थित प्राचीन श्री रघुनाथ मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय भगवद्गीता एवं श्रीमद् भागवत प्रवचन कार्यक्रम के चौथे दिन का आयोजन किया गया। इस मौके पर श्री कल्याण कमल आश्रम हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी कमलानंद गिरि महाराज ने प्रवचन करते कहा कि जो व्यक्ति नित्य भगवद्गीता का अध्ययन करता है, उसे बैकुंठ की प्राप्ति होती है। बैकुंठ वह स्थान है जहां न पाप है, न कर्मफल का बंधन और न ही भय व शोक। वहां केवल आत्मस्वरूप का बोध होता है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति नियमित गीता अध्ययन और प्राणायाम करता है, उसे दोबारा माता के गर्भ में नहीं आना पड़ता और जन्म-जन्मांतर के पाप व ताप नष्ट हो जाते हैं। कमलानंद गिरि ने कहा कि यह नश्वर शरीर तो बाहर से बार-बार साफ किया जाता है, लेकिन हृदय में जमे जन्म-जन्मांतर के कर्म दोषों को केवल गीता ज्ञान से ही शुद्ध किया जा सकता है। अन्य शास्त्रों में विस्तार अधिक है, जबकि गीता में सार ही सार है। गीता भगवान के मुख से निकली होने के कारण महाप्रसाद है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को इसका अध्ययन और श्रवण अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर स्वामी सुशांतानंद महाराज ने भी अपने प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर किया।
शहर में श्री रघुनाथ मंदिर चल रही भगवद्गीता एवं श्रीमद् भागवत समारोह के दौरान प्रवचन करते स्वामी