अंबाला। छठे नवरात्र पर छावनी के बीसी बाजार शिव मंदिर, श्री सनातन धर्म मंदिर, प्राचीन हाथीखाना शिव मंदिर और कालीबाड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं ने भीड़ लगी रही। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ मां कात्यायनी की पूजा कर आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही छावनी के हिल रोड स्थित श्री सनातन धर्म मंदिर में छठे नवरात्र पर मां कात्यायनी की पूजा अर्चना की। इसके बाद मंदिर में छह वर्ष की कन्या का पूजन किया गया। शाम को भक्ति भाव से सामूहिक कीर्तन , माता की आरती और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
इस दौरान पंडित प्रवेश उनियाल बताते हैं कि मां कात्यायनी नवदुर्गा या हिंदू देवी पार्वती शक्ति के नौ रूपों में छठवें रूप में है। यह अमर कोष में पार्वती के लिए दूसरा नाम है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि वह परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थी। जिन्होंने देवी पार्वती की ओर से दी गई सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया। वह शक्ति की आदि रूपा है।
परंपरागत रूप से देवी दुर्गा की तरह वे लाल रंग से जुड़ी हुई हैं। नवरात्रि उत्सव के षष्ठी में उनकी पूजा की जाती है। योग साधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक मां कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से मां के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।
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इसी तरह से अंबाला छावनी के बीसी बाजार स्थित शिव मंदिर में छठे नवरात्र पर मां कात्यायनी की पूजा हुई। मंदिर के पुजारी पंडित संजीव बैंजवाल बताते हैं सुबह पांच बजे मंदिर से महिला कीर्तन मंडली की और से प्रभात फेरी निकाली गई। यह प्रभात फेरी मंदिर से शुरू हुई और स्टाफ रोड, जगाधरी रोड से होकर मंदिर में समाप्त हुई। इसके बाद सुबह नौ से लेकर दोपहर 12 बजे और दोपहर तीन से शाम पांच बजे तक महिला मंडली की ओर से रामचरितमानस का पाठ किया। शाम को मंदिर में श्रद्धालुओं ने माथा टेककर माता का आशीर्वाद लिया।