अंबाला सिटी। जिला पीएनडीटी की टीम ने घटते लिंगानुपात को काबू में लाने के लिए सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। पीएनडीटी की टीम ने छावनी और साहा के दो केंद्रों की जांच की।
इस दौरान कमियां मिलने पर छावनी के एक नर्सिंग होम में स्थित अल्ट्रासाउंड केंद्र की मशीन को सील कर दिया। वहीं, साहा के केंद्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। केंद्र संचालक को 15 दिनों में जवाब देने के लिए नोटिस दिया है। अगर समय पर जवाब नहीं दिया तो नियमों के अनुसार केंद्र को भी सील किया जा सकता है। जवाब नहीं देने तक मशीन को भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
ये मिलीं कमियां
छावनी स्थित नर्सिंग होम में टीम पहुंची तो उन्हें पीएनडीटी की एंट्री में कमियां मिलीं और रिकॉड भी अधूरा था। पुराने रिकाॅड का भी सही तरीके से प्रबंधन नहीं था। केंद्र में भ्रूण लिंग जांच न करने संबंधित पोस्टर भी कम संख्या में लगाए थे। आमतौर पर अल्ट्रासाउंड केंद्रों में इस प्रकार के पोस्टर लगाए जाते हैं। वहीं, साहा के केंद्र में जो भी पीएनडीटी का डॉटा था वहीं सही तरीके से दिखाई नहीं दे रहा था। इसी कारण कारण बताओ नोटिस ही जारी किया गया है। जांच के दौरान पीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. विपिन भंडारी, डॉ प्रवीण, डॉ. देवपाल शामिल रहे।
वर्तमान में लिंगानुपात की स्थिति
जिला अंबाला में 910 का लिंगानुपात चल रहा है। जबकि बीते वर्ष ये 913 था। बीते वर्ष के मुकाबले लिंगानुपात में कमी देखने को मिली है। इसके साथ प्रदेश स्तर पर भी जिला अंबाला का ग्राफ घटता जा रहा है। इसी कारण राज्य स्तरीय टीम ने भी बीते सप्ताह ही अंबाला का दौरा किया था। इसमें टीम की ओर से पीएनडीटी अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि लिंगानुपात को सुधारने के लिए लगातार दबिश देकर केंद्रों की जांच करें।
तीन माह में होती है केंद्रों की जांच
जिला स्तरीय पीएनडीटी टीम की ओर से प्रत्येक तीन माह में अल्ट्रासाउंड केंद्र और एमटीपी केंद्रों की जांच कराई जाती है। जिसमें जरूरी दस्तावेजों की जांच होती है। जिला अंबाला में 85 अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं तो वही 28 एमटीपी केंद्र चल रहे हैं। एक बार सभी केंद्रों की जांच पूरी हो चुकी है। जांच के दौरान पंजीकरण और गर्भवतियों का रिकार्ड जांच जाता है।
फरवरी में मेडिकल स्टोर को किया था सील
इससे पहले भी अंबाला सिटी के रंजीत नगर में एमटीपी किट बेचने के चलते एक मेडिकल स्टोर को सील किया था। इसमें दुकान, एमआर और दवा बनाने वाली कंपनी का प्रबंधक भी काबू किया जा चुका है। एमटीपी किट की मदद से गर्भपात में आसानी होती है। इसी के चलते स्टोर को भी सील किया था।
15 दिनों में देना होगा जवाब
राज्य स्तरीय टीम की ओर से दिए निर्देशों पर ही जांच कराई जा रही है। विभाग की ओर से तीन महीने में एक बार सभी केंद्रों की जांच होती है। इसलिए लगभग पूरे वर्ष ही जांच जारी रहती है। लिंगानुपात को सुधारने के लिए लगातार काम जारी है। केंद्रों को नोटिस जारी किया है उन्हें 15 दिनों में जवाब नहीं दिया तो सीलिंग भी हो सकती है।
-डाॅ. विपिन भंडारी, नोडल अधिकारी, पीएनडीटी अंबाला।