अंबाला। कैंट के नागरिक अस्पताल में यूनानी मेडिसन ओपीडी में मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जहां पहले रोजाना 80 से 100 मरीज उपचार के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 20 से 25 रह गई है। मरीजों की संख्या कम होने का मुख्य कारण यूनानी चिकित्सा पद्धति के बारे में पर्याप्त प्रचार-प्रसार न होना माना जा रहा है। कुछ समय पहले यूनानी ओपीडी में आवश्यक दवाइयों का स्टॉक कम था, जिसके चलते मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ा। इससे मरीजों का भरोसा कमजोर हुआ और उन्होंने इस ओपीडी से दूरी बना ली। हालांकि अब दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, लेकिन इसके बावजूद मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है।
यूनानी ओपीडी में तैनात डॉक्टर ताहिरा बेगम ने बताया कि यूनानी चिकित्सा पद्धति यूनान से आई एक प्राचीन पैथी है, जो पूरी तरह जड़ी-बूटियों पर आधारित है। इसमें मरीजों को शरबत, चटनी, माजून, जवारिश और खमीरे जैसी औषधियां दी जाती हैं। खमीरे में सच्चे मोती और ड्राई फ्रूट्स का प्रयोग किया जाता है, जिससे शरीर को ताकत मिलती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
डॉ. ताहिरा बेगम के अनुसार यूनानी ओपीडी में त्वचा रोग, पेट दर्द, कब्ज, गैस, फैटी लीवर, बवासीर, जोड़ों के दर्द, खांसी-जुकाम, शुगर सहित विभिन्न बीमारियों के मरीज उपचार के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि सायटिका से पीड़ित एक मरीज, जो झुककर चलने को मजबूर था और पीजीआई तक इलाज करा चुका था, उसे यूनानी उपचार से मात्र 20 दिनों में ठीक कर दिया गया। इसी तरह फैटी लीवर की तीसरी स्टेज से पीड़ित एक महिला को छह महीने में सामान्य स्थिति में लाया गया। इसके अलावा उन्होंने बताया कि टाइफाइड के मरीजों के लिए सीरप और खमीरा भी आ रहा है जो सबसे उत्तम है। डाक्टर का मानना है कि यदि यूनानी ओपीडी का सही ढंग से प्रचार किया जाए और मरीजों को उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जाए, तो मरीजों की संख्या में फिर से बढ़ सकती है। संवाद