फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambala News: एक करोड़ से बने क्यू शेल्टर पर नहीं रुकती एक भी बस

विज्ञापन
अंबाला छावनी की रंगिया मंडी में बना क्यू शेल्टर। संवाद - फोटो : सांकेतिक
विज्ञापन
अंबाला। छावनी में यात्रियों की सुविधा के लिए एक करोड़ की लागत से बनाए गए बस क्यू शेल्टर कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गए हैं। जिस उद्देश्य से इनका निर्माण किया गया था, वह पूरी तरह से दम तोड़ता नजर आ रहा है। यहां अंबाला डिपो को छोड़कर अन्य कहीं की बसें नहीं रुकती हैं। सुभाष पार्क के पास बने बस क्यू शेल्टर से पंखे ही गायब हो चुके हैं।
विज्ञापन

पड़ताल में सामने आया कि रखरखाव के अभाव में यहां लगाए गए पंखे पूरी तरह से बंद हो चुके हैं। वहीं बारिश के दिनों में इन बस क्यू शेल्टर की छतें टपकती रहती हैं। रही-सही कसर विज्ञापन का काम करने वाले लोगों ने पूरी कर दी है। इसलिए बस क्यू शेल्टर का पूरा ढांचा अब केवल निजी कंपनियों के विज्ञापनों का केंद्र बनकर रह गया है।
छावनी के प्रमुख मार्गों पर बने इन शेल्टरों को देखकर ऐसा लगता है मानो इनका एकमात्र मकसद विज्ञापनों से कमाई करना है। बस स्टैंड की दीवारें पोस्टर से अटी पड़ी हैं लेकिन वहां लगे पंखे प्रशासन के दावों की पोल खोल रहे हैं। भीषण गर्मी में यात्री पसीने से तरबतर होकर बस का इंतजार करने को मजबूर हैं। बुजुर्गों और महिलाओं का कहना है कि कुछ दिनों तक सब कुछ ठीक चला लेकिन बाद में न तो बिजली आई और न ही पंखों की सुध ली गई।
विज्ञापन

-
चालक कर रहे मनमर्जी
पड़ताल के दौरान एक और हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई। बसें शेल्टर के ठीक सामने रुकने के बजाय उसके आगे या पीछे जाकर खड़ी होती हैं। इस कारण यात्रियों को सामान के साथ बस तक दौड़ना पड़ता है। नियमानुसार बस का ठहराव शेल्टर के पास ही होना चाहिए लेकिन चालक अपनी मर्जी से बसें रोक रहे हैं।
-
बिजली के तार तक गायब
सिविल अस्पताल के पास स्थित बस शेल्टर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। यहां असामाजिक तत्वों ने पंखों को तोड़ दिया है, तो वहीं बिजली के मुख्य तार भी काट दी गई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय यहां नशेड़ियों का जमावड़ा लगता है। पुलिस की गश्त न होने के कारण ये असामाजिक तत्व सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
-
यात्री बोले-
अगर बस क्यू शेल्टर का रख-रखाव नहीं कर सकते थे, तो शेल्टर बनाए ही क्यों, अब तो पंखे भी शो-पीस बन गए हैं और बसें भी शेल्टर से आगे-पीछे रुकती हैं। इसमें सबसे ज्यादा मनमानी प्राइवेट बस वाले करते हैं।
- अनिल
-
जब नए-नए बस क्यू शेल्टर बने थे तो पंखों की हवा आती थी। वहीं रोडवेज का एक कर्मचारी भी यहां तैनात रहता था ताकि बसें निर्धारित बस क्यू शेल्टर पर रुकें, लेकिन अब व्यवस्था बिगड़ चुकी है।
- मलकीत सिंह
-
भीषण गर्मी के मौसम में बस क्यू शेल्टर के नीचे खड़े नहीं हो सकते, क्योंकि यहां पंखे भी बंद हैं। मजबूरन पेड़ की छांव में खड़ा होना पड़ता है। वहीं, विज्ञापनों ने भी बस क्यू शेल्टर की सुंदरता पर भी ग्रहण लगा दिया है।
सुलोचना देवी
-
वर्जन
बस क्यू शेल्टर का रख-रखाव नगर परिषद की जिम्मेदारी है। हमार काम बसों से संबंधित है। अगर बसें बस क्यू शेल्टर पर नहीं रुक रही हैं तो यह गंभीर बात है। इसकी जांच करवाई जाएगी और संबंधित चालक व परिचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन

- अश्वनी डोगरा, महाप्रबंधक, अंबाला डिपो

ये बस क्यू शेल्टर रोडवेज के लिए बनाए गए थे। अब इनका रख-रखाव नगर परिषद ने करना है या रोडवेज ने, ये संबंधित विभाग से पूछताछ करके ही बताया जा सकता है।
- देवेंद्र नरवाल, कार्यकारी अधिकारी, नप सदर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें