फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दान देते समय कभी भी अभिमान नहीं होना चाहिए, हमेशा तन-मन, धन भगवान को समर्पित करें - आचार्य चैतन्य महाराज

विज्ञापन
विज्ञापन
अंबाला सिटी। लक्ष्मी नगर स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर धर्मशाला में चल रही श्रीमद्भागवत सप्ताह अमर कथा के चौथे दिन बुधवार को आचार्य सनातन चैतन्य महाराज ने भक्त ध्रुव, पुरंजन, भरत चरित्र, अजामिल, भक्त प्रहलाद, गज-ग्राह, समुद्र मंथन आदि पर व्यख्यान किया। उन्होंने कहा कि राजा बली ने गुरु शुक्राचार्य की कृपा से शक्ति प्राप्त कर स्वर्ग लोक पर आधिपत्य प्राप्त कर लिया था। राजा बली ने 99 यज्ञ किए। सौवें यज्ञ के समय भगवान वामन भिक्षा मांगने जाते हैं और राजा बली से तीन पग भूमि की याचना करते हुए उनसे संकल्प लेते हैं।
विज्ञापन

इसके बाद वामन भगवान दो पग में समूचे लोक को नाप लेते हैं। जब तीसरे पग के लिए कुछ शेष नहीं रह जाता तो राजा बली अपना सिर भगवान के सामने रख देते हैं। भगवान राजा बली पर कृपा करते हुए सुतल लोक का अधिपति बना देते हैं और खुद सुतल लोक के चौकीदार बन जाते हैं।
कथा व्यास आचार्य सनातन चैतन्य महाराज ने कहा कि तीन पग भूमि मांगने का अर्थ है कि भगवान हम सबसे कह रहे हैं, कि तन, मन व धन मुझे समर्पित करो और दान देते समय कभी अभिमान नहीं होना चाहिए। सूर्य वंश में श्रीराम जन्म व चंद्र वंश में श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान के अनेकों अवतार हुए हैं। त्रेतायुग में श्रीराम भगवान ने अवतार लेकर अहंकारी राक्षसों का सर्वनाश किया। वहीं, द्वापर युग में चंद्रवंशी श्रीकृष्ण भगवान ने अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हुए अधर्मियों का सर्वनाश किया। कथा के समापन समारोह के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
विज्ञापन

जिसमें भगवान लला के लिए सुंदर झूला डाला गया। डोल नगाड़ों के साथ आतिशबाजी की आवाजों के बीच भगवान श्रीकृष्ण जी का जन्मोत्सव मनाया गया। वहीं कथा व्यास चैतन्य महाराज द्वारा प्रस्तुत किए गए भजन नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की आदि पर सभी भक्तों ने खूब तालियां बजाकर नृत्य किया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की आरती की गई और माखन मिश्री का प्रसाद वितरित किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें