अंबाला सिटी। नगर निगम चुनाव का कभी भी बिगुल बज सकता है। लगभग सभी औपचारिकताएं 27 नवंबर तक पूरी हो जाएंगी। अब बस सभी को इंतजार है तो सिर्फ भाजपा-कांग्रेस के उम्मीदवारों की सूची का। हालांकि नगर निगम के चुनाव में तुरप का सिक्का बनने को आतुर कांग्रेस से बागी पूर्व मंत्री निर्मल सिंह की पार्टी हरियाणा डेमोक्रेटिव फ्रंट ने मेयर पद का प्रत्याशी दीपावली से पहले ही घोषित कर अपने शह-मात के इस खेल में बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पिछले 54 साल में अंबाला शहर विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ रही है। अभी तक 8 बार यहां से जनसंघ/भाजपा के प्रत्याशी की जीत हुई है जबकि 5 बार कांग्रेस इस विधानसभा सीट पर अपना वर्चस्व लहरा चुकी है। गत वर्ष हुए नगर निगम के चुनावों में भी भाजपा के करीब 13 पार्षदों को जीत मिली थी जबकि 7 वार्डों में कांग्रेस के पार्षद बने थे। ऐसे में भाजपा को बने रहने, कांग्रेस को सत्ता में काबिज होने और तीसरे मोर्चे के रूप में उभरकर सामने आए हरियाणा डेमोक्रेटिव फ्रंट को जीत के लिए सर्दी के सीजन में खूब पसीना बहना पड़ेगा।
बागियों ने बिगाड़ा कांग्रेस का खेल, भाजपा को मिला लाभ
अतीत के झरोंकों में झांककर देखने तो यह साफ है कि इस विधानसभा सीट पर टक्कर सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस की ही होती आई है। यह बात अलग है कि बागियों ने हमेशा कांग्रेस का खेल बिगाड़ने का काम किया है जिसका सीधे तौर पर फायदा भाजपा को मिला है फिर चाहे वह विधानसभा के चुनाव रहे हों, लोकसभा के या गत वर्ष पहली बार हुए नगर निगम के चुनाव। सभी में ऐसा ही हुआ है। 2014 में कांग्रेस से बागी पूर्व मंत्री विनोद शर्मा दूसरे नंबर पर रहे थे। भाजपा के असीम गोयल ने 60 हजार 216 वोट 37.30 प्रतिशत हासिल कर कांग्रेस पार्टी छोड़कर हरियाणा जन चेतना पार्टी बनाने वाले विनोद शर्मा को 23 हजार 252 वोटों के विशाल अंतर से हराया था। शर्मा को 36 हजार 964 वोट पड़े थे जोकि कुल वोटों का मात्र 22.90 प्रतिशत रहे।
कांग्रेस के हिम्मत सिंह को 34 हजार 658 यानी 21.47 प्रतिशत वोट मिले थे। इस तरह कांग्रेस की हार का मुख्य कारण विनोद शर्मा बने। वहीं दूसरी और वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के असीम गोयल को कुल 64 हजार 896 वोट (42. 2 प्रतिशत) हासिल कर कांग्रेस के बागी एवं निर्दली उम्मीदवार निर्मल सिंह मोहड़ा को 8952 वोटों के अंतर से हराया था। निर्मल को 55 हजार 944 वोट यानी 36.38 प्रतिशत वोट मिले थे। कांग्रेस के जसबीर मल्लौर 20 हजार 91 यानी 13.07 प्रतिशत वोट इस तरह यहां भी निर्मल सिंह के बागी होने के कारण इस विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
5 माह में घट गया था भाजपा का 25 हजार का वोट बैंक
मई 2019 में 17 वीं लोक सभा आम चुनावों में अंबाला आरक्षित लोक सभा सीट के अंतर्गत पड़ने वाले कुल 9 विधानसभा हलकों में से एक अंबाला शहर क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार रतन लाल कटारिया को तब कुल पड़े 1 लाख 57 हजार 898 वोटों में से 90 हजार 316 वोट प्राप्त हुए थे। कांग्रेस की कुमारी सैलजा को 55 हजार 715 वोट मिले थे। इस प्रकार गत वर्ष मात्र पांच माह में ही अंबाला शहर में भाजपा के 25 हजार 420 वोट कम हो गए थे। हालांकि 13वीं विधानसभा और 16वीं लोकसभा के चुनावों में भी इसी तरह भाजपा का वोट बैंक घटा था। 2014 में 13वीं हरियाणा विधानसभा आम चुनावों में शहर विधानसभा हलके में 2 लाख 28 हजार 573 मतदाता थे। इनमें से 70.63 प्रतिशत यानी 1 लाख 61 हजार 441 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस चुनाव में भी शहर में कांग्रेस प्रत्याशी की हार का कारण पार्टी बागी विनोद शर्मा का अलग चुनाव लड़ना था। इससे पूर्व 2014 में 16वीं लोक सभा आम चुनावों में शहर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार रतन लाल कटारिया को कुल पड़े 1 लाख 44 हजार 886 वोटों में से 74 हजार 416 वोट प्राप्त हुए थे। वहीं कांग्रेस के राजकुमार वाल्मीकि को 36 हजार 957 वोट मिले थे। इस तरह वर्ष 2014 में छ: माह में अंबाला शहर में भाजपा के 14 हजार 200 वोट घट गए थे।