अंबाला सिटी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों को नगर निगम दरकिनार कर रहा है। एनजीटी के निर्देश पर नगर निगम पर काकड़ू डंपिंग साइट पर कचरा डालने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
इसके बाद नगर निगम ने अपनी डंपिंग साइट तो वहां से हटा दी, मगर अभी तक जुर्माने की राशि जमा नहीं कराई। ऐसे में नगर निगम ट्रिब्यूनल के निर्देशों को हल्के में लेता दिख रहा है। इस जुर्माना राशि को निश्चित समय पर भरना था। मगर सात से आठ महीने बीतने पर भी यह जुर्माना राशि नहीं भरी गई। अब जल्द ही इस मामले में एनजीटी सख्त कदम उठा सकता है।
काकड़ू में अवैध रूप से डंप हो रहा था कचरा
अंबाला-चंडीगढ़ राजमार्ग पर बलदेव नगर के आगे गांव काकड़ू के पास नगर निगम काफी बड़े स्थान पर कचरा डंप कर रहा था। इस पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने जाकर देखा तो यहां सॉलिड वेस्ट अधिनियम के नियमों की अवहेलना मिली। वहां कचरे पर बेसहारा पशु और पक्षी भी विचरण कर रहे थे। इन नियमों को तोड़ने पर सात से आठ महीनों का 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
क्षतिपूर्ति राशि पहुंच सकती है 60 लाख रुपये
दूसरी ओर अंबाला और पंचकूला की कचरा निस्तारण साइट पटवी प्लांट के लिए कभी भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सख्त कदम उठा सकता है। इसके लिए नगर निगम पर 60 लाख रुपये तक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई जा सकती है। इसकी गणना कर ली गई है। इसको लेकर कभी भी आदेश आ सकते हैं। अब देखने वाली बात होगी कि इसे भी नगर निगम भरेगा या दरकिनार करेगा। पटवी प्लांट में भी साॅलिड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट के नियमों की अनदेखी हो रही है। प्रदूषण पानी जमीन में जा रहा है और जमीन को प्रदूषित कर रहा है। इसके साथ ही यहां कचरे का कोई रिकॉर्ड भी नहीं है।
जुर्माने के बाद बंद नहीं करा पाना मजबूरी : पूर्व चेयरमैन
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व चेयरमैन राघवेंद्र राव बताते हैं कि पीसीबी के सामने यही दिक्कत आ रही है कि शहरी स्थानीय निकाय विभाग पर जुर्माना तो लगा दिया जाता है। मगर वे जुर्माना नहीं भरते हैं। अगर कोई प्राइवेट उपक्रम ऐसा करे तो पीसीबी नोटिस देकर उसे बंद कर देता है मगर नगर निगम को कैसे बंद किया जाए। इस पर ट्रिब्यूनल ही ठोस कदम उठा सकता है।
वर्जन
काकड़ू गांव में नगर निगम ने कचरा डालना तो बंद कर दिया है। मगर अभी तक जुर्माने का 10 लाख रुपये नहीं भरा है। इसको लेकर एनजीटी सख्ती से निपट सकती है।
-अजय मलिक, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अंबाला।