कुरुक्षेत्र। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और सकारात्मक दृष्टिकोण का समग्र विकास करना है। यह बात कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सोमनाथ सचदेवा ने विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में आयोजित आमंत्रित व्याख्यान व एमओयू हस्ताक्षर समारोह में कही। इलेक्ट्रॉनिक्स साइंस विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रो. सचदेवा ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को उद्योगों और समाज की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए कौशल आधारित शिक्षा जरूरी है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने भारत सरकार के बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (बीओएटी) के साथ समझौता कर 10 से अधिक अप्रेंटिसशिप इंटीग्रेटेड डिग्री प्रोग्राम शुरू किए हैं, जिनमें विद्यार्थियों को उद्योगों में प्रशिक्षण के साथ स्टाइपेंड भी मिलेगा। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय देश के उन अग्रणी संस्थानों में शामिल है, जहां इस प्रकार की पहल की गई है। कुलगुरु ने कहा कि शिक्षा में हेड, हैंड और हार्ट यानी ज्ञान, कौशल और मूल्यों का संतुलित विकास आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षता और सकारात्मक सोच विकसित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री विश्वकर्मा स्किल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवाओं को कौशलयुक्त बनाना होगा। उन्होंने कहा कि केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव भी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को जापानी, जर्मन और फ्रेंच जैसी विदेशी भाषाएं सीखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि तकनीकी शिक्षा के साथ भाषा कौशल रोजगार के वैश्विक अवसर बढ़ाता है।
मानव रचना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने भगवद्गीता एवं नेतृत्व विषय पर कहा कि सफल नेतृत्व के कई सूत्र श्रीमद्भगवद्गीता में निहित हैं। उन्होंने सीखने की प्रवृत्ति, आत्मानुशासन, सकारात्मक सोच और सहयोग की भावना को नेतृत्व के महत्वपूर्ण गुण बताया। व्याख्यान के बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, श्री विश्वकर्मा स्किल विश्वविद्यालय और मानव रचना विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों के तहत संयुक्त अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप, इंटर्नशिप, कौशल विकास कार्यक्रम, छात्र-शिक्षक आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।