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लटका एमसीए का प्रस्ताव, अधर में विकास

Tue, 02 Feb 2016 12:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
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एक साल पहले ट्विनसिटी के बीस वार्डों के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी  विकास योजना अधर में लटक गई है। इस योजना के तहत सिटी व कैंट के सभी वार्डों में 20 करोड़ रुपये की स्पेशल ग्रांट से विकास करवाया जाना था। बाकायदा,  इस विकास योजना का प्रस्ताव मेयर, कमिश्नर और सभी पार्षदों की मौजूदगी में तैयार कर सरकार के पास भेजा गया था और सरकार से अंबाला के सभी वार्डों के विकास के लिए बीस करोड़ के स्पेशल ग्रांट की मांग की गई थी, लेकिन इस प्रस्ताव को सरकार के पास भेजे भी करीब एक साल गुजर चुका है, लेकिन आज तक इस सरकार पर न तो सरकार की स्वीकृति आई और न ही इस विकास प्रस्ताव को आगे बढ़ाया गया। करोड़ों रुपये का ये विकास प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़ा है। जबकि दूसरी ओर, अंबाला के सभी वार्डों में लोग कई तरह की बुनियादी  समस्याओं से जूझ रहे हैं।
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ये था विकास प्रस्ताव
म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) की सदन की बैठक में मेयर रमेश लाल मल ने एमसीए कमिश्नर और सभी बीस वार्डों के पार्षदों की मौजूदगी में चर्चा के बाद इस  विकास प्रस्ताव को पास किया था। इस प्रस्ताव में अंबाला कैंट व सिटी के सभी बीस वार्डों में एक-एक करोड़ रुपये वहां की बुनियादी समस्याओं पर खर्च किए जाने थे। इस प्रस्ताव को सिरे चढ़ाने के लिए सरकार को ये प्रस्ताव भेजकर बीस करोड़ रुपये मांगे गए थे, लेकिन अब ये प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया है।
ये है वार्डों की बुनियादी समस्याएं
-सभी वार्डों में सबसे बड़ी समस्या हैं टूटी व जर्जर सड़कों की, अधिकतर गलियां व सड़कें उखड़ी पड़ी है, उन पर चलना मुश्किल
-वार्डों  की करीबन डेढ़ कालोनियां ऐसी है, जहां बहुत सी गलियां अभी तक कच्ची हैं,  वहां के बाशिंदें इन गलियों में मलबा फेंककर रास्ता बनाए हुए हैं, बरसातों  के दिनों में ये रास्ते बड़ी मुसीबत बन जाते हैं।
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-वार्डों की डेढ़ सौ से ज्यादा कॉलोनियों में बरसाती व गंदे पानी की निकासी ही नहीं है, न तो यहां नालियां है और न ही यहां नाले।
-वार्डों में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था तो बुरी तरह से चरमराई हुई है, शाम ढलते ही अधिकतर इलाकों में पसर जाता है अंधेरा
-वार्डों में गंदगी भी बाशिंदों की सबसे बड़ी मुसीबत बनी हुई है, कई इलाके तो ऐसे, जहां महीनों कोई सफाई कर्मी ही नहीं आता।
-वार्डों  की कई कॉलोनियां ऐसी है, जहां आज भी बरसाती पानी खड़ा है, इनमें जहरीले  कीड़े पनपे हुए हैं, जिससे लोगों की खासी परेशानी बनी हुई है, उनके घरों  में सीलन व दरारें तक आ रही हैं।
-वार्डों में पर्याप्त डस्टबीन ही नहीं हैं, मजबूरन लोगों को खाली प्लॉटों में कूड़ा फेंकना पड़ रहा है, जिससे माहौल बहुत खराब हो जाता है।
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सभी पार्षदों और कमिश्नर से चर्चा करने के बाद प्रस्ताव को सदन में पास करवाकर सरकार के पास भेजा गया था। सभी पार्षदों की इस विकास परियोजना पर सहमति थी। इसे प्रस्ताव के तहत सरकार से अंबाला के सभी वार्डों में एक-एक करोड़ के विकास करवाने के लिए बीस करोड़ की स्पेशल ग्रांट मांगी थी, लेकिन एक साल गुजरने को हैं, अभी तक उन्हें ये भी नहीं बताया जा रहा है कि एमसीए सदन का प्रस्ताव किस स्तर पर लटकाया हुआ है। सरकार को विकास कार्यों में भेदभाव नहीं करनी चाहिए।
-रमेश लाल मल, मेयर, एमसीए-
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सदन ने जब प्रस्ताव पारित कर सरकार के पास स्पेशल ग्रांट लिखा है तो सरकार को सदन के पार्षदों की सहमति और लोगों की वार्डों में समस्याओं को देखते हुए तुरंत विकास कार्यों के लिए बीस करोड़ की स्पेशल ग्रांट रीलीज करनी चाहिए थी, लेकिन एक साल तक प्रस्ताव पर कोई जवाब न देना, तो उचित नहीं है।
-सुधीर जयसवाल, डिप्टी मेयर, एमसीए-
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विकास परियोजनाओं के प्रस्ताव यदि सरकार एक-एक साल लटकाएगी, तो इसी बात से अंदाजा  लगाया जा सकता है कि सरकार की मंशा क्या है? वार्डों में इस वक्त बुनियादी समस्याओं ने लोगों को बुरी तरह से घेरा हुआ है। वैसे तो वार्डों में एक-एक करोड़ से ज्यादा काम होने हैं, लेकिन फिलहाल बीस करोड़ की स्पेशल ग्रांट रीलीज कर सरकार वार्डों में विकास की शुरुआत तो करे। लोगों में समस्याओं के चलते सरकार के खिलाफ रोष व्याप्त हो रहा है।
-दुर्गा सिंह अत्रेय, सीनियर डिप्टी मेयर, एमसीए-
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लोग बोले, पार्षदों को सुध नहीं, अफसर सुनते नहीं
वार्डों में लटके विकास को लेकर जहां पार्षद भले ही अफसरों और सरकार पर ठीकरा फोड़ रहे हों, लेकिन वार्डवासी पार्षदों और अफसरों दोनों को इसका जिम्मेदार मान रही है। कैंट निवासी विनोद कुमार, दीपक, पूरन चंद, मनीष, करतार सिंह, जयपाल, राम सिंह, बलजिंद्र सिंह, निर्मला, पूनम, बिमला, मीनाक्षी, कमला,  सौरभ कौशल, किशन लाल, दर्शन लाल, सिमरनजीत सिंह, अश्वनी सालवान, बीडी थापर व  सिटी निवासी राजदीप सिंह, टोनी, राजेश व हन्नु ने बताया कि वार्डों में समस्याओं की ओर इस वक्त न तो पार्षद देख रहे हैं और न ही अफसर। लोगों के अनुसार वार्डों में लोग बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं। लोग अपना रोना पार्षदों के पास लेकर जाते हैं, तो पार्षद उन्हें यही जवाब देते हैं कि अफसर उनकी नहीं सुनते। लोगों ने बताया कि पार्षदों, अफसरों और सरकार  को वार्डों की समस्याओं की सुध लेनी पड़ेगी। क्योंकि लोग यहां बहुत ज्यादा दुखी हैं।
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