माता-पिता रोते-बिलखते रहे, पैर भी पकड़े लेकिन औलाद का मन नहीं पसीजा। मान-मर्यादाओं को ताक पर रखकर पिछले 37 माह में 858 युवाओं ने प्रेम विवाह किया। कुछ मामलों में तो परिवार ने विवाह की पूरी तैयार कर रखी थी, मंडप सज चुका था, इंतजार था तो सिर्फ दुल्हन का, लेकिन वह भी फुर्र हो गई। अपने सपनों को साकार करने के लिए खानदान की इज्जत तक दाव पर लगाकर प्रेमी के साथ भागने से नहीं चूकीं। बिरादरी और रिश्तों को तार-तार कर अपनों से ही भय बताकर जिला प्रशासन द्वारा प्रेमी जोड़ों के लिए बनाए गए सेफ हाउस में शरण ली। ज्यादातर प्रेम विवाह आस-पड़ोस या गांव में होने से दोनों पक्षों में मनमुटाव और तनाव भी रहा। आंकड़े गवाह हैं कि 2017 में 224, 18 में 273 और 19 में बढ़कर आंकड़ों की संख्या 334 तक पहुंच गई है। इस साल भी पहले माह में 27 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। माना जा रहा है कि सोशल मीडिया से प्रेम विवाह को बढ़ावा मिला है। चेटिंग के दौरान पता ही नहीं चलता कि कब कौन, किसकी तरफ आकर्षिक हो चुका है। इसके अलावा टीवी सीरियल ने भी युवाओं को प्रेम विवाह के लिए उकसाया है।
पंजाब एवं हरियाणा तथा सेशन कोर्ट से लेते हैं सुरक्षा
शादी के बाद परिवार से भय बताकर प्रेमी जोड़े पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट एवं सेशन कोर्ट से सुरक्षा लेते हैं। कोर्ट के आदेशों पर पुलिस जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए सेफ हाउस में निर्धारित समय तक उन्हें रखा जाता है। जिन लोगों से भय बताया जाता है, पुलिस काउंसलिंग में उन्हें कानून व नियम तोड़ने के फायदे-नुकसान बताए जाते हैं। उसके बाद कोर्ट के आदेश पर वापस भेज दिया जाता है।
वर्तमान में प्रेम विवाह का प्रचलन लगातार बढ़ रहा है। सोशल मीडिया के प्रयोग व टीवी सीरियल में प्रेम विवाह की पटकथा ज्यादा दिखाई जाने के कारण युवा वर्ग इस और आकर्षित हो रहा है। उन्हें लगता है कि दुनिया में प्रेम विवाह के इलावा कुछ भी नहीं। वह नहीं जानते कि समाज व बिरादरी के प्रति भी एक जिम्मेदारी होती है। कहा भी जाता है कि प्यार का भूत सिर चढ़कर बोलता है। प्रेम विवाह के नुकसान और संयुक्त परिवार के फायदों से अंजान युवा विवाह तो कर लेते हैं लेकिन उन्हें परिवार व समाज की मान-मर्यादा का भी ध्यान रखना चाहिए।
अरविंदर कौर, जिला प्रोटेक्शन अधिकारी, अंबाला।