संवाद न्यूज एजेंसी, बराड़ा। उगाला अनाज मंडी में गेहूं का उठान धीमा होने से मंडी अटी पड़ी है। चारों तरफ गेहूं की बोरियां दिखाई दे रही हैं। ऐसे में आढ़ती और किसान परेशान नजर आ रहे हैं। सरकार के दिशा निर्देशानुसार मंडी में फसल के पहुंचने के 48 घंटे के बाद उठान की व्यवस्था और उठान के 72 घंटे के बाद पेमेंट सीधा किसान के खाते में की गई है। इससे किसान को किसी प्रकार की असुविधा न हो, लेकिन ट्रांसपोर्टरों की मनमर्जी से 48 घंटे तक भी उठान नहीं हो रहा है। इससे अनाज में वजन कम होने की समस्या और जगह की तंगी हो रही है।
किसानों को समय पर फसल का भुगतान नहीं हो रहा है। इससे आगामी सीजन के खाद और बीज खरीदने में उन्हें असमर्थता महसूस हो रही है। हालांकि आढ़ती एसोसिएशन और मंडी की ओर से ट्रांसपोर्टरों को बार-बार मौखिक तौर पर कहा गया, लेकिन उठान धीमी गति से चल रहा है। इसका खामियाजा आढ़ती और किसानों दोनों को भुगतना पड़ रहा है।
पोर्टल पर दिखाए 129 ट्रक, काम कर रहे केवल 5-6
वहीं कच्चा आढ़ती एसोसिएशन खरीद केंद्र उगाला के प्रधान कमल कुमार ने हैफेड प्रबंधक को लिखित पत्र में कहा कि हैफेड द्वारा 25 अप्रैल तक करीब 70 हजार कट्टों की खरीद की जा चुकी है, लेकिन 34 हजार 398 कट्टों का ही उठान हुआ है। मंडी में कोई शेल्टर भी नहीं है और न ही किसानों की फसल गिरवाने के लिए कोई जगह खाली बची है क्योंकि सारी मंडी गेहूं के कट्टों से भरी पड़ी है। उठान न होने के कारण कट्टे का वजन दिन प्रतिदिन कम हो रहा है।
ट्रांसपोर्ट कंपनी मनदीप ट्रांसपोर्ट ने उगाला मंडी से उठान के लिए पोर्टल पर 129 ट्रक दर्ज करवाए हुए हैं, इनमें से केवल 4-5 ट्रक ही मंडी से उठान कार्य कर रहे हैं। सारी फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी है। प्राकृतिक आपदा आगजनी, बारिश के कारण यदि कोई नुकसान होता है और यदि वजन कम होता है तो इसका काफी नुकसान होगा। इसलिए किसानों ने मांग की है कि जल्द से जल्द यहां गेहूं का उठान करवाया जाए।
हजारों बोरियों पड़ी मंडी में
वहीं द बराड़ा कोऑपरेटिव मार्केटिंग कम प्रोसेसिंग सोसायटी लिमिटेड का कहना है कि उगाला मंडी से गेहूं उठान के लिए मनदीप ट्रांसपोर्टर कंपनी को टेंडर दिया गया है। इसके लिए कंपनी को लिखित में पत्र भी दिया गया है। इसमें लिखा गया कि कंपनी द्वारा उगाला मंडी को उठान के लिए कम ट्रक दिए हैं। इससे हजारों बोरियां मंडी में ही पड़ी हैं। यदि मौसम खराब होने से गेहूं खराब होती है तो इसकी जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टर कंपनी की होगी।