- बार एसोसिएशन के प्रधान बोले- चुनिंदा सरकारी वकीलों की नियुक्ति करना पूरी तरह गलत
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। लीगल एंड डिफेंस काउंसलिंग सिस्टम के विरोध में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के वकीलों का प्रदर्शन उग्र रूप लेता जा रहा है। ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर शुरू हुई वकीलों की क्रमिक भूख हड़ताल दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रही, जिसका व्यापक असर अंबाला शहर बार एसोसिएशन में देखने को मिला। वकीलों ने नई व्यवस्था के खिलाफ गहरा रोष जताते हुए न्यायिक कार्य नहीं किया। इस कारण से अंबाला की 26 अदालतों में करीब 1300 से अधिक मामले लंबित हो गए हैं।
बार एसोसिएशन के प्रधान सतपाल सिंह और एडवोकेट गुरप्रीत सिंह अंटाल ने कहा कि वकील मुफ्त कानूनी सहायता के खिलाफ नहीं हैं लेकिन जिस तरीके से चुनिंदा सरकारी वकीलों की नियुक्ति की जा रही है, वह पूरी तरह गलत है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि शिकायतकर्ता, पुलिस और बचाव पक्ष तीनों स्तरों पर सरकार की ही भूमिका होगी, तो पीड़ित को निष्पक्ष न्याय कैसे मिलेगा। इससे युवा और आम वकीलों की रोजी-रोटी भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
अधिवक्ताओं का आरोप
भूख हड़ताल पर बैठीं अधिवक्ता सरिता जरोरा ने आरोप लगाया कि इस प्रणाली में भारी अनियमितताएं हैं। आरोपियों और उनके परिजनों को गुमराह किया जा रहा है। इससे पूरी लीगल बिरादरी की साख पर बट्टा लग रहा है। वकीलों का साफ कहना है कि जब तक इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया जाता या इसे वापस नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
लोगों को हाे रही परेशानी
एक तरफ जहां दो दिन से अधिवक्ताओं की हड़ताल चल रही है तो वहीं जमानत के मामले भी लटक गए हैं। अधिवक्ता जेल में बंद अपने मुव्किलों की सुनवाई के लिए नहीं आ रहे हैं। अंबाला सिटी निवासी गुरबक्श सिंह ने बताया कि उन्हें अपने रिश्तेदार को जमानत पर रिहा कराना है। इसके लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसी प्रकार लेबर कोर्ट में भी अधिवक्ताओं के न जाने से मामले बढ़ते जा रहे हैं। श्रमिकों का कहना हे कि वह दूर से आते हैं और उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है।