अंबाला सिटी। राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत नागरिक अस्पताल सहित स्वास्थ्य केंद्रों में कुत्ते के काटने से घायल मरीजों के घाव धोने के लिए विशेष स्थान बनाए थे। मगर अब इन स्थानों का इस्तेमाल होता दिखाई नहीं दे रहा।
नागरिक अस्पताल में बने घाव धोने की जगह पर ताले लटके रहते हैं। इसके साथ ही यहां पर कर्मचारी भी नियुक्त नहीं किया है। ट्राॅमा सेंटर में आने वाले घायल मरीजों को खुद ही घाव धोने के लिए भेजा जाता है। जबकि इन जगहों को बनाने के लिए 12 लाख रुपये खर्च किए थे। इसमें अंबाला सिटी, अंबाला छावनी, नारायणगढ़, मुलाना, बराड़ा, चौड़मस्तपुर, शहजादपुर और अंबली पीएचसी में बनाए हैं।
घाव न धोएं तो हो सकता है रैबीज
कुत्ते के काटने से रैबीज के विषाणु घाव के जरिये शरीर के भीतर जा सकते हैं। इसलिए कुत्ते के काटने के बाद घाव को धोना बहुत जरूरी होता है। रैबीज पानी में पूरी तरह से घुल जाता है। इसलिए घायल को अपने घाव अच्छी तरह से धोने चाहिए। इससे रैबीज का खतरा कम हो सके। इसलिए इन जगहों को स्वच्छता के आधार पर बनाया है।
रोजाना आते हैं 20 मामले
नागरिक अस्पताल अंबाला सिटी में कुत्ते के काटने के करीब 20 मामले सामने आते हैं। इसके साथ ही 20 से 25 मरीज अन्य टीके लगवाने के लिए आते हैं। इन दिनों मरीजों के घाव धोने के लिए इस जगह का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इसके साथ ही यहां पर अलग से कर्मचारी भी नियुक्त नहीं किया गया है। जिससे लोगों को इस जगह के बारे में पता चल सके।
वर्जन
इस बारे में स्वास्थ्य केंद्रों को जगह के इस्तेमाल संबंधी जानकारी के लिए पत्र लिखा जाएगा। अगर कहीं पर जगह का इस्तेमाल नहीं हो रहा है तो उस बारे में भी जवाब मांगा जाएगा।
-डॉ. जशनप्रीत सिंह, जिला टीकाकरण अधिकारी अंबाला।