साहा (अंबाला)। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़कर केसरी गांव की दविंदर घर पर मशीनें लगाकर ऊन कोटी, टोपी और जुराब बना रही हैं। इसके साथ ही वह ग्रुप की महिलाओं को रोजगार दे रही हैं।
गर्मियों में वह ऊन से बने सामान को स्टॉक करके रखती हैं। इसके बाद सर्दी आने पर इन्हें दुकानों पर सप्लाई कर आय कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सामान सप्लाई करने के बाद उन्होंने अपनी दुकान भी खोली है, जिस पर यह सामान बेचती हैं।
वर्ष 2019 में समूह से जुड़ीं
दविंदर ने बताया कि 2019 में वह हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ गई। इसके बाद उन्होंने बच्चों और बड़ों के लिए ऊन की कोटी, टोपी और जुराब बनाने के शुरू कर दिए। इसके लिए वह लुधियाना से होलसेल में ऊन खरीदकर लाती थीं। कुछ समय बाद ही उन्होंने अपने घर में दो मशीनें लगा ली और मशीन पर काम करने लगी। इसके बाद उन्होंने दुकानों पर ऊन की कोटी, टोपी और जुराबों की सप्लाई शुरू कर दी।
शुरू किया होलसेल में काम
दविंदर ने बताया कि उन्होंने चार साल तक अंबाला सिटी और अंबाला छावनी के दुकानदारों से स्वेटर, टोपी और जुराब के ऑर्डर लिया करती थीं। इसके बाद वह ग्रुप की अन्य महिलाओं की सहायता से ऑर्डर का सामान तैयार करने के बाद दुकानों पर सप्लाई किया करती थी। इससे उन्हें अच्छी आमदनी होती थी। इसके बाद उन्होंने अपनी दुकान खोल ली।
दुकान खोलते ही आने लगे ग्राहक
दविंदर बताती है कि जब से उन्होंने अपने गांव में ऊन के स्वेटर, जुराब और टोपी तथा कॉस्मेटिक के सामान की दुकान खोली है। तब से लंगरछन्नी, लंडा, दीनारपुर और अन्य गांव से लोग खरीदारी के लिए आने लगे।
केसरी निवासी दविंदर। स्वयं