वशिष्ठ नगर में गली के नुक्कड़ पर लगा ट्रांसफॉर्मर।
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वशिष्ठ नगर में घर के आगे लगाए गए ट्रांसफार्मर को अब बिजली निगम को हटाना होगा। करीब 10 महीने की प्रशासनिक और कानूनी लड़ाई के बाद नंद किशोर को आखिरकार इस मामले में कोर्ट से न्याय मिल गया है। अब बिजली निगम को उसके घर से करीब 140 मीटर दूर ट्रांसफार्मर लगाना पड़ेगा। ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने का खर्च भी बिजली निगम ही वहन करेगा। सिविल न्यायाधीश जूनियर कोर्ट मुकेश कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
दरअसल छावनी के 68 वर्षीय वशिष्ठ नगर निवासी नंद किशोर सूद ने बताया कि सूद कंस्ट्रक्शन कंपनी के नजदीक मुख्य सड़क पर उनके घर के बाहर ही बिजली निगम ने ट्रांसफार्मर लगा दिया। हालांकि इस दौरान उन्होंने पारिवारिक सदस्यों विशेषकर छोटे बच्चों के खेलने की जगह का हवाला देकर दूसरी खाली जगह पर ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने की गुहार लगाई। तत्कालीन एक्सईएन पवन नरूला ने उचित स्थान मिलते ही ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने का आश्वासन दिया। लेकिन 3 महीने इसी उधेड़बुन में ही निकल गए। परिवार ने न्यायालय का सहारा लिया और 27 जून को निचली अदालत में अपील दायर की।
इसमें एक्सईएन व एसडीओ को पार्टी बनाया गया। लगभग 9 महीने तक चले वाद-विवाद और दस्तावेजों के आधार पर न्यायाधीश ने 28 जुलाई को उनके हक में फैसला सुनाया। आरटीआई कार्यकर्ता क्षितिज दत्ता ने बताया कि कोर्ट में जाने से पहले बिजली निगम में आरटीआई लगाकर ट्रांसफार्मर लगने की सही जगह की जानकारी मांगी गई थी। वकील पवन कुमार गोयल ने बताया कि शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए सबूतों के आधार पर न्यायालय ने अपना फैसला दिया है।
नहीं मिले कोर्ट के आदेश
कुछ दिन पहले ही ज्वाइन किया है। केस देखकर ही कुछ बता सकूंगा। अभी कोर्ट के आदेश की प्रति नहीं मिली है।
-कर्ण जांगड़ा, एसडीओ बब्याल।