पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटा अंबाला इस बार बाढ़ के दंश से सबसे अधिक प्रभावित हुआ। बाढ़ के बाद सिंचाई विभाग ने टांगरी, घग्गर और मारकंडा नदी की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें पाया गया कि तीनों नदियों ने अपने पारंपरिक रास्ते को छोड़कर नई धाराएं बनाई, जो कि अधिक नुकसान का कारण बना।
विभाग के अनुसार
सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, मारकंडा नदी ने मुलाना में दो ओर आगे चलकर तीन धाराएं बनाईं। यही कारण रहा कि पहली बार शाहाबाद डूब गया, जो बंधे बनाए गए थे, उसके बगल से नदी के पानी ने अपना रास्ता निकाल लिया। यही स्थिति टांगरी में भी दिखाई दी। इधर घग्गर का पानी बढ़ा तो पंजाब के कुछ क्षेत्र को डुबोता हुआ अंबाला और पास लगते पंजाब के क्षेत्रों को डुबो गया।
भविष्य में पहाड़ों से अत्यधिक पानी और बारिश का पानी आया तो फिर से यह नदियां घरों और गांवों को डुबोती हुईं अपना रास्ता बनाएंगी। बाढ़ के स्थाई समाधान पर एक ही रास्ता निकलकर आया है कि इन सभी नदियों में माइनिंग या खोदाई का कार्य जल्द से जल्द कराया जाए। इसके लिए सिंचाई विभाग जल्द ही सरकार को जिला प्रशासन के माध्यम से अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
अंबाला में टांगरी, मारकंडा और घग्गर तीनों नदियों की जमीन का जब रिकॉर्ड राजस्व विभाग के पास देखते हैं तो इसमें से सभी नदियों की जमीन या तो जमीदारों की है या शामलात की है। ऐसे में वर्षों से नदियों की जमीन अधिग्रहित ही नहीं हुई तो यहां अन्य कार्य भी नहीं हो सके। इसलिए अब यह प्रक्रिया काफी जटिल हो चुकी है। क्योंकि अगर सरकार अब जमीन अधिग्रहित करती है तो करोड़ों रुपये खर्च करने होंगे।
खोदाई ही एकमात्र सहारा
तीनों नदियों की जांच के बाद सिंचाई विभाग के इंजीनियरों ने यही निर्णय लिया है कि इन नदियों की खोदाई का कार्य होना चाहिए। अंबाला की सीमा में अगर नदियों की सही से खोदाई हो जाए तो यहां पर बाढ़ को अच्छी तरह से संभाला जा सकता है। इसके लिए सिंचाई विभाग अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन के सामने पेश करेगा। इसके बाद जिला प्रशासन से नदियों का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा जाएगा। इसके बाद सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद खनन विभाग निजी कंपनियों को इन नदियों के पूरे क्षेत्र पर खनन कराएगा। इस पूरी परियोजना का खाका खींचा जा रहा है।
अंबाला की तीनों नदियों का दायरा
टांगरी- 15 किलोमीटर
मारकंडा- 35 किलोमीटर
घग्गर- 07 किलोमीटर
यह तीन कार्य होते तो बाढ़ का असर कम रहता
- टांगरी, मारकंडा और घग्गर की कभी सफाई नहीं कराई गई। (सिंचाई विभाग नहरों माइनरों की ही सफाई करता है।)
- इन तीनों नदियों में तो कुछ पर काफी दूर तक बंधा तक नहीं है।
- तीनों नदियों पर माइनिंग का कार्य नहीं हुआ।
अब नदियों को लेकर क्यों सख्त निर्णय लेने की जरूरत
अंबाला में नदियों से आई बाढ़ ने हजारों लोगों की जान आफत में डाल दी। इसके बाद नदियों के साथ काफी सिल्ट ओर अन्य कचरा बहकर आ गया है, जिससे नदियों की तलहटी भी ऊंची हुई है। ऐसे में इनकी खोदाई अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि फिर पहाड़ों की बारिश हुई तो यह आसानी से कई गांवों व शहरी क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकती है।
- घग्गर : बाढ़ के बाद इसकी नई धारा शहरी इलाके को डुबोती दिखी। खासकर मनमोहन नगर व इसके बाद के क्षेत्रों को घग्गर के पानी ने डुबोया।
- टांगरी: बंधे के करीब तक पानी आ गया, अगर कुछ दिन और बारिश होती या पानी पीछे से छोड़ा जाता तो अंबाला कैंट का महेश नगर व इसके साथ लगती कॉलोनियां निश्चित तौर पर डूब सकती थीं।
- मारकंडा: पहले मारकंडा नदी के पास के हेमामाजरा में आठ फीट पानी खेतों तक आता था। वह अब चार फीट पर ही पहुंच जाता है। इस बार यहां से मुलाना में तीन धाराएं देखी गईं। मारकंडा नदी के पुराने पुल के आधा किलोमीटर आगे नदी ने तीन धाराएं बनाईं, जिसमें एक तरफ हमीदपुर दूसरी तरफ हेमामाजरा और तीसरा रास्ता नदी का मूल रास्ता दिखाई दिया जो कि काफी चौड़ा हो गया। अगर इसी प्रकार नदी ने धाराएं बनाईं तो आगे भी कई गांव इसकी जद में आएंगे। दूसरी तरफ बरसाती बेगना नदी बारिश के दिनों में फुल हो जाती है ऐसे में बेगना आगे चलकर मारकंडा में मिल जाती है, जबकि मारकंडा पहले से भी अपने बेग के साथ बह रही होती है। यह स्थित काफी विकराल हो जाती है।