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अंतरराष्ट्रीय स्तर के संसाधन नहीं, कैसे करें पदकों की उम्मीद

Fri, 19 Aug 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
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gold medal - फोटो : getty
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 न तो अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल संसाधन हैं और न ही उपकरण, ऐसे में जिले से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी कैसे तैयार किए जा सकेंगे। खिलाड़ी की पहली सीढ़ी स्कूल लेवल पर खेल संसाधनों की जबरदस्त कमी है, जबकि इसके बाद हालात कुछ ज्यादा बेहतर नहीं हैं। सालों से इन्हीं संसाधनों के जरिये खेलों में खिलाड़ी जूझ रहे हैं, लेकिन अभी तक ओलंपिक जैसे इवेंट में अंबाला से ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं निकला, जिसने पदक जीता हो। अब हालात यह हैं कि खेलों में भागीदारी तक ही जिला के खिलाड़ी सीमित हैं।
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यह स्थिति है संसाधनों की
जिला अंबाला में करीब तेरह साल पहले वार हीरोज स्टेडियम में खेल विभाग की योजना के तहत हॉलैंड से मंगवाए गए जिमनास्टिक उपकरण लगाए गए थे। इसके बाद से अंबाला में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल संसाधन ही नहीं मिल पाए हैं। खेलों को लेकर न तो मैदान इस स्थिति में हैं कि इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुसार खिलाड़ी अभ्यास कर पाएं और न ही खिालाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए आधुनिक उपकरण हैं। ऐसे ही हालात स्कूलों में हैं, जहां पर खेल संसाधन तक नहीं हैं। शिक्षा विभाग के पास भी खेल आयोजन के लिए बजट मिलता है, लेकिन स्कूलों में खेल संसाधन देने के लिए भी हर साल कुछ चुनिंदा स्कूलों की जरूरतें ही पूरी होती हैं।

से कोच हैं खेल विभाग के पास
जिला खेल विभाग के पास लगभग हर खेल का प्रशिक्षक है। विभाग की मानें तो हॉकी, रेसलिंग, स्वीमिंग, कबड्डी व खो-खो, जूडो, फुटबॉल, बैडमिंटन, बॉक्सिंग, साइकिलिंग, फेंसिंग क्रिकेट, स्केटिंग, योग, वेटलिफ्टिंग के एक-एक कोच हैं। इसी तरह जिमनास्टिक व हैंडबाल के तीन-तीन व एथलेटिक में दो कोच खेल विभाग के पास हैं।
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ये हैं कमी
- खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए खेल संसाधनों की कमी है
- जिला के छह ब्लॉक लेवल स्टेडियमों में ट्रेनिंग के लिए कुछ नहीं है, स्टेडियमों के हालात बदतर हैं
- खेलों के लिए आधुनिक उपकरण व ट्रेनिंग खिलाड़ियों को नहीं मिलती
- स्पोर्ट्स मेडिसन और स्पोर्ट्स साइंस के बारे में खिलाड़ी अनजान हैं
- खेल चयन को लेकर साइंटिफिक मैथेड से काम नहीं किया जाता
- डाइट के मामले में खिलाड़ी पिछड़े हैं, जबकि स्पोर्ट्स मेडिसन नहीं दी जाती
- खेल एसोसिएशनों की सक्रियता नहीं होने से कंपीटिशन का माहौल नहीं पैदा होता
- रेसलिंग में ही अखाड़ों की परंपरा हाशिये पर जा रही है, चुनिंदा अखाड़े ही बचे हैं
- स्कूलों से ही स्पोर्ट्स कल्चर पनप नहीं पा रहा है
- खेल विभाग के पास न तो अपना हॉकी मैदान है और न ही क्रिकेट मैदान
- साइकिलिंग, फेंसिंग के कोच हैं, लेकिन इसके लिए संसाधन ही नहीं हैं
- एथलेटिक कोच है, लेकिन कैंट में एथलेटिक ट्रैक नहीं है सिटी में है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय स्टेंडर्ड का नहीं है

नहीं पनप रहा स्पोर्ट्स कल्चर
बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्यवीर शुक्ला, राजेश रस्तोगी, फुटबॉल प्लेयर रहे राम प्रकाश, बनारसी दास, हरजीत सिंह, कुलवंत का कहना है कि अंबाला में स्पोर्ट्स कल्चर ही पनप नहीं पा रहा है। खेल योजनाएं बनती हैं, लेकिन उसमें भी राजनीति होती है। जिन जिलों में खेल संसाधन बेहतर हैं, वहां से पदकों की उम्मीद है, लेकिन जहां पर यह संसाधन ही नहीं हैं, वहां से कैसे खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद कर सकते हैं। यदि जिला स्तर पर किसी भी तीन चार गेम को लेकर ही खेल संसाधन आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर के दिए जाएं तो कम से कम उन खेलों में तो इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी सामने आएंगे।


प्रदेश सरकार खेलों को काफी बढ़ावा दे रही है। अंबाला में ही इंटरनेशनल लेवल का फुटबॉल मैदान और एथलेटिक ट्रैक बनने जा रहा है, जबकि बैडमिंटन हाल भी जल्द ही तैयार होगा। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिए हर स्तर पर सुविधाएं जुटाई जा रही हैं। कोशिश यही है कि अंबाला से बेहतरीन खिलाड़ी निकलें, जिसके लिए विभाग की ओर से कोच भी दिए गए हैं।
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- अरुणकांत, जिला खेल अधिकारी, अंबाला
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