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Ambala News: कर्मभूमि की जगह जननायक एक्सप्रेस को बनाया बाल तस्करी का जरिया

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अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर मौजूद जननायक एक्सप्रेस से रेस्कयू किए गए बच्चे। फाइल फोटो
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- ट्रेन चलने का समय रात का होने के कारण उठा रहे फायदा, आरपीएफ ने बढ़ाई निगरानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। आरपीएफ व जिला युवा विकास संगठन की सख्ती के बाद मानव तस्करों ने बाल तस्करी से जुड़ा पुराना तरीका बदल लिया है। कैंट स्टेशन पर हाल ही में हुई दो बड़ी कार्रवाइयों में ये खुलासा हुआ है। अब तस्कर दोपहर की भीड़ के बजाय रात के सन्नाटे का सहारा ले रहे हैं। पूछताछ में सामने आया है कि तस्करों ने अब ट्रेन नंबर 12407 कर्मभूमि एक्सप्रेस की जगह 15211 जननायक एक्सप्रेस को नया जरिया बना लिया है। तस्करों को लगता है कि रात को जांच टीम कम सक्रिय रहती है और इस ट्रेन का समय भी रात 10 बजे के बाद का है इसलिए अब इसी ट्रेन से सफर कर रहे हैं।
आरपीएफ की टीम ने लगातार दो बार ट्रेनों में दबिश देकर काफी संख्या में बच्चों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया। प्राथमिक पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर, पुलिस की नजरों से बचने के लिए तस्करों ने न सिर्फ ट्रेनें बदली हैं बल्कि स्टेशन पर दाखिल होने का समय भी बदल दिया है। पहले दोपहर में आने वाली कर्मभूमि एक्सप्रेस से बच्चों को भेजा जाता था, अब रात में आने वाली जननायक एक्सप्रेस का इस्तेमाल हो रहा है।
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गरीब परिवारों को बना रहे निशाना
तस्कर गांव-देहात के उन परिवारों को निशाना बनाते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति खराब है। परिजनों को 8 से 10 हजार रुपये का लालच देकर बच्चों को पंजाब और हिमाचल प्रदेश ले जाया जाता है। वहीं परिजनों को प्रत्येक माह तनख्वाह मिलने का भी भरोसा दिया जाता है। इसी भरोसे के चलते बच्चों के परिजन तस्करों के झांसे में आ जाते हैं और फिर बच्चों को उनके साथ भेज देते हैं। खुलासा होने के बाद आरपीएफ ने रात के समय चलने वाली ट्रेनों में एस्कॉर्ट और सादी वर्दी में जवानों की तैनाती बढ़ा दी है। जांच में पता चला है कि इन बच्चों को पंजाब और हिमाचल के ढाबों, ईंट-भट्टों और छोटे कारखानों में बंधुआ मजदूरी के लिए ले जाया जाता है। आरपीएफ अब उन एजेंटों की तलाश में है जो गांवों में बैठकर इन मासूमों का सौदा तय करते हैं।
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तस्करों के बदले हुए तौर-तरीकों पर हमारी नजर है। रात की ट्रेनों में विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और मासूमों को रेस्क्यू कर बाल सुधार गृह भेजा जा रहा है।
रविंद्र सिंह, प्रभारी आरपीएफ, अंबाला
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