अतिरिक्त जिला जज की अदालत ने याचिका पर सुनाया फैसला
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। नेशनल हाईवे-344 के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजे का विवाद निपट गया है। इस लंबे विवाद पर जिला अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही जमीन का मालिकाना हक किसी और के पास हो, लेकिन यदि वह जमीन लंबी अवधि के लीज पर है, तो उसका पट्टाधारक भी मुआवजे का हकदार है।
अतिरिक्त जिला जज डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) द्वारा दायर एक याचिका पर यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कुल मुआवजे का 1/8 हिस्सा (12.5 प्रतिशत) देने का आदेश दिया है। बाकी 7/8 हिस्सा जमीन के मूल मालिक वरिंद्र सिंह को मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि अधिग्रहण से कंपनी का आउटलेट प्रभावित हुआ है, इसलिए पट्टाधारक होने के नाते वह मुआवजे में उचित हिस्सेदारी की हकदार है
लीज पर काबिज था आईओसीएल
इंडियन ऑयल ने साल 2000 में गांव पपलोथा (तहसील बराड़ा) में वरिंद्र सिंह से 16 कनाल 1 मरला जमीन 33 साल के लिए लीज पर ली थी। इस जमीन पर मैसर्स सत्यसाई फिलिंग स्टेशन के नाम से पेट्रोल पंप चलाया जा रहा था। साल 2009 में सरकार ने हाईवे निर्माण के लिए इसमें से 5 कनाल 13 मरला जमीन अधिग्रहित कर ली। 2013 में लैंड एक्विजिशन ऑफिसर ने करीब 35.51 लाख रुपये का पूरा मुआवजा जमीन मालिक वरिंद्र सिंह को जारी कर दिया। इंडियन ऑयल का तर्क था कि लीज पर कब्जा होने के कारण वे भी मुआवजे के हकदार थे, लेकिन उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया। वहीं जमीन मालिक ने यह भी आपत्ति जताई थी कि याचिका 2021 में दायर की गई, जो बहुत देर से है। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मुआवजे के बंटवारे के मामलों में समय सीमा की कोई निश्चित बाध्यता नहीं है।