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संकट के समय में सभी संबंधी छोड़कर भाग सकते हैं पर भगवान नहीं : कीर्तिकिशोरी महाराज

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अंबाला सिटी के सैक्टर दस स्थित श्री वैष्णो माता मंदिर भवन में चल रही श्रीमद भागवत कथा में प्रवचन ? - फोटो : Ambala
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सेक्टर दस स्थित श्री वैष्णो माता मंदिर मेें चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन व्यास कीर्तिकिशोरी महाराज ने कहा कि मित्रता का भाव बड़ा ही अनोखा है। जिस मनुष्य पर संकट के बादल छा जाते हैं, सबसे पहले उसके सगे संबंधी छोड़कर भाग जातेे हैं। मगर, एक सच्चा मित्र वही होता है, जो दुख संकट के समय में भी अपने मित्र के साथ निस्वार्थ भाव से खड़ा होता है। वह उस संकट से निकालने का हर संभव प्रयास करता है।
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इस प्रकार की मित्रता रखने वाले को ही वास्तव में अच्छा मित्र कहा जा सकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्रों को कभी नहीं भुलाया, चाहे वह गरीब सुदामा क्यों न हो। सुदामा जब बहुत बुरे संकट से गुजर रहा था। उस समय उनके पास खाने को भी कुछ शेष नहीं था। ऐसी परिस्थितियों में वह मित्र सुदामा भगवान श्रीकृष्ण जी के दरबार में पहुंचता है। जहां पर भगवान ने स्वयं उनका शिष्टाचार किया और राजपाठ की गद्दी पर बिठाया।
सभी रानियों को उसकी सेवा में लगाया और खुद उसके पांव धोए। सभी नगर के लोगों को बड़े ही उत्साह के साथ बताया, देखो मेरा बहुत अच्छा मित्र मुझसे मिलने आया है। जबकि सुदामा तो संकट की घड़ी में उनके पास आया था।
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सुदामा ने मित्रता के उत्साह को देखा और अपने लिए कुछ भी मांगने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। भगवान श्रीकृष्ण जी ने जब पूछा कि मेरे परम मित्र मुझसे मिलने आए हो, तो मेरे लिए कुछ भेंट आदि तो लेकर आए होंगे। वह मुझे दे दीजिए। ऐसे में सुदामा ने सोचा इतने बड़े महल में हो रही चहल-पहल में मैं यदि अपने मित्र को कुछ अच्छी भेंट नहीं दे पाया तो मेरे मित्र का कहीं निरादर न हो जाए। इसलिए अपने साथ लेकर आए मुठ्ठी भर चावलों को छुपाने की कोशिश करने लगा।
चावल खाकर प्रसन्न हुए श्रीकृष्ण
भगवान श्रीकृष्ण ने जबरन वह चावलों की पोटली सुदामा से ले ली और चावल खाने लगे। चावल खाकर भगवान बहुत प्रसन्न हुए और कहा कि मित्र यदि आपको कुछ चाहिए तो निसंकोच बोलो। इस बात को सुनकर सुदामा कुछ भी बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए और बिना कुछ मांगे ही वहां से निकल गए। भगवान श्रीकृष्ण जी ने बिना मांगे अपने मित्र को तीनों लोकों का ऐश्वर्य प्रधान किया। भगवान कभी नहीं देखते कि यह मेरा भक्त गरीब है या धनवान है। वह प्रत्येक परिस्थितियों में साथ देते हैं। इसलिए यदि मित्रता करनी है, तो भगवान श्रीकृष्ण जैसी करें।

अंबाला सिटी के सैक्टर दस स्थित श्री वैष्णो माता मंदिर भवन में चल रही श्रीमद भागवत कथा में उपस्थित- फोटो : Ambala

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