अंबाला सिटी। राम नाम के जाप से ही भगवान श्रीराम की कृपा को हासिल किया जा सकता है। जब श्रीराम के नाम से तो समुद्र के पानी पर पत्थर भी तैरने लग गए थे, तो मनुष्य के लिए अपने जीवन की नैय्या को पार करना मुश्किल नहीं है। स्मरण में भगवान श्रीराम नाम का रस होना चाहिए, ये सद्विचार गीतादेवी महाराज ने श्रीराम नवमी के उपलक्ष्य में अंबाला सिटी के ऐतिहासिक श्री अनंत प्रेममंदिर में आयोजित कथा में कहे। इस दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के नाम के स्मरण के महत्व के बारे में बताया।
गीता महाराज ने कहा कि श्रीराम चरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने स्पष्ट कहा है कि कलियुग केवल नाम अधारा, सिमर-सिमर नर उतरहीं पारा। अर्थात् भगवान श्रीराम के नाम को बार-बार सिमरन करने से जीव भव से पार होकर प्रभु के चरणों में स्थान प्राप्त कर लेता है। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान की प्राप्ति सरलतम और सर्वोत्तम साधन राम नाम ही है। इस अवसर पर मंदिर की साध्वियों ललिता, प्रवीण, अलका, नीलम, पूनम, स्नेह आदि द्वारा गाए भजनों ने श्रोताओं का मन मोह लिया। कथा के समापन पर विशेष आरती की गई जिसमें सुरजीत नागपाल, सुरेश अरोड़ा, सुरेश ओझा, पंडित तिलक राज शर्मा, सुरेन्द्र सचदेवा, राममूर्ति पुणयानी, धर्विन्द्र सिंह चावला, गौरव अरोड़ा आदि ने भाग लिया।