अंबाला छावनी के श्री सनातन धर्म मंदिर में आयोजित कथा के दौरान करुणागिरी महाराज के प्रवचन सुनते
अंबाला। श्री सनातन धर्म सभा के 89 वें वार्षिक महोत्सव पर आयोजित श्री शिव महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के सातवें दिवस पर रामेश्वरम धाम की कथा का वर्णन किया।
अमृतवर्षा करते हुए बाल योगिनी 1008 महामंडलेश्वर करुणागिरी महाराज ने शिव के अर्द्धनारीश्वर अवतार का वर्णन किया। श्री शिव पुराण के अनुसार रामेश्वरम एक ऐसा तीर्थ स्थान है, जहां स्नान और दर्शन दोनों का महत्व है। भारत के चारों धामों में एक धाम तथा 12 ज्योतिर्लिंगों में एक ज्योतिर्लिंग है रामेश्वरम।
कथा विस्तार में महाराज ने बताया कि श्रीराम ने जब रावण का वध करने के लिए समुद्र किनारे शिव लिंग की स्थापना करनी चाही, क्योंकि श्री राम प्रत्येक कार्य से पहले अपने अराध्य श्री शिव जी की अराधना करते थे, तो उन्होंने जामवंत जी से कहा कि मुझे एक ऐसे आचार्य की आवश्यकता है जो शिव भक्त और विष्णुभक्त दोनों हो। विभीषण की सलाह पर जामवंत लंकेश के पास गए। रावण ने जामवंत से कहा कि आप एक तपस्वी के मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा के यज्ञ का आचार्य बनने का निमंत्रण देने मुझे आए हैं। अगर यजमान मजबूर है तो आचार्य का कर्तव्य है कि वह सारी व्यवस्थाएं साथ लेकर आए।
मेघनाद के साथ सीता जी विमान में बैठकर यज्ञ में रावण के कहने पर श्री राम के वामांग में बैठी और यज्ञ पूर्ण हुआ। शिवलिंग की स्थापना हुई। रावण ने एक पुरोहित की तरह श्रीराम को आशीर्वाद दिया कि आपने जो मनोरथ सोचा है, वह अवश्य पूरा होगा। महाराज ने शिव सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ व उससे फल प्राप्ति का प्रसंग भी विस्तार से सुनाया। श्री सनातन धर्म सभा की ओर से प्रधान प्रो. तारा चंद गुप्ता, सभा महासचिव सुधीर विन्दलस, कोषाध्यक्ष अशोक सिंगला आदि ने महाराज का अभिनंदन किया।