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स्वास्थ्य और शिक्षा का क्षेत्र पैसे कमाने के लिए नहीं है- राज्यपाल---

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अंबाला छावनी स्थित बीपीएस प्लेनेटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में मंथन स्कूल लीडरशिप समिट-2021 में ? - फोटो : Ambala
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अंबाला। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि आज के दौर में शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। शिक्षा से व्यक्ति में अच्छे संस्कार आते हैं और वह जीवन में नई ऊंचाइयों को छूता है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि बच्चों को प्राइमरी व उच्च शिक्षा से ही उनकी रुचि अनुसार कौशल शिक्षा दी जाए ताकि वह बड़े होकर नौकरी ढूंढने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय शनिवार को बीपीएस प्लेनेटोरियम छावनी में आयोजित मंथन स्कूल लीडरशिप समिट-2021 में उपस्थित नेशनल इंडिपेंडट स्कूल अलायंस(निसा) से जुड़े स्कूलों के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
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उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने निसा को यह महत्वपूर्ण समिट आयोजित करने पर हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं भी दीं। कहा कि यह समिट शिक्षा के सुधार में एक मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने निसा द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट का भी विमोचन किया। यह कोविड-19 के संकट काल के दौरान ऑनलाइन शिक्षा, लर्निंग लॉस आदि बच्चों की शिक्षा से संबंधित विषयों पर तैयार की गई है। इससे पूर्व कार्यक्रम में पहुंचने पर निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने राज्यपाल को गुलदस्ता देकर और शॉल भेंट कर उनका स्वागत किया। उन्होंने राज्यपाल को निसा की शिक्षा के क्षेत्र में चल रही विभिन्न गतिविधियों एवं भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि उन्हें इस बात से भी खुशी हो रही है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मूल्य आधारित शिक्षा, कौशल व व्यवसायिक शिक्षा तथा बच्चों के समग्र विकास पर काफी जोर दिया गया है। नई शिक्षा नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि बच्चों को प्राइमरी व उच्च शिक्षा से ही उनकी रुचि अनुसार कौशल शिक्षा दी जाए, ताकि ये बच्चे बड़े होकर नौकरी ढूंढने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा पैसे कमाने के लिए नहीं हैं। ये मानव संसाधन विकास के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, जिनसे न तो समझौता किया जा सकता है और न ही व्यापार किया जा सकता है। आज स्पर्धा का युग है। ऐसे में अंग्रेजी के मंहगे स्कूलों में पढ़े हुए बच्चे आगे निकल जाते हैं और ग्रामीण बच्चे अंग्रेजी न आने से हीन भावना का शिकार हो जाते हैं। ऐेसे में उन बच्चों की ओर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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बच्चे मातृभाषा का भी ज्ञान दिल से प्राप्त करें
राज्यपाल ने कहा कि अंग्रेजी के साथ अपनी मातृभाषा का भी ज्ञान बच्चे दिल से प्राप्त करें। जो शिक्षा दिल से प्राप्त की जाती है उससे अच्छे संस्कार आते हैं और व्यक्ति समाज में एक अच्छा नागरिक बनकर देश के विकास में अपना योगदान देता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के द्वारा ही बेरोजगारी को दूर किया जा सकता है। शिक्षा से व्यक्ति का जीवन स्तर ऊंचा उठता है, व्यक्ति में नैतिकता बढ़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि पैसे से बेरोजगारी दूर नहीं की जा सकती, मात्र शिक्षा से ही इसे दूर किया जा सकता है।
गुणवत्ता की शिक्षा के साथ बच्चों की खेल गतिविधियों पर किया है फोकस
उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा सरकार ने गुणवत्ता की शिक्षा के साथ बच्चों की खेल गतिविधियों पर फोकस किया है। हरियाणा राज्य में ग्यारह सौ से अधिक सरकारी प्ले स्कूल कार्यरत हैं। बच्चों को गुणवत्ता की शिक्षा देने के लिए सरकार द्वारा एक सौ सैंतीस संस्कृति मॉडल स्कूल खोले गये हैं। सुपर-100 कार्यक्रम के तहत गरीब मेधावी छात्रों को जेईई-नीट परीक्षा के लिए नि:शुल्क कोचिंग दी जा रही है। इस साल सुपर-100 के 26 छात्रों को आईआईटी में दाखिले के लिए चुना गया है। यह हम सब के लिए गर्व की बात है।
बच्चों का पूरी तरह पोषण करना चाहिए
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा हमें बच्चों का पूरी तरह पोषण करना चाहिए ताकि ये बड़े होकर जिम्मेदार और सशक्त नागरिक बनें। बच्चों में शुरू से ही मूल्यों, अनुशासन, व्यवहारिक शिष्टाचार और देश के प्रति प्रेम का झुकाव होना चाहिए। हमें बच्चों का नेशन फर्स्ट की भावना के साथ सर्वागीण विकास करना है। प्रत्येक बच्चे को स्काउट्स एनसीसी, एनएसएस, खेल और कई अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें, जिसके लिए हमारे स्कूल परिसर में एक आधारभूत तंत्र की आवश्यकता है। उन्होंने निसा से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि सभी सदस्य स्कूलों को एनईपी-2020 को लागू करने के लिए तिमाही, अर्धवार्षिक और वार्षिक शेड्यूल तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में मैंने उन्हें एनईपी-2020 के कार्यान्वयन के लिए त्रैमासिक, अर्धवार्षिक व वार्षिक कार्यक्रम बनाने के लिए कहा है।
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