फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ग्रांउड रिपोर्ट: अंबाला में चुनौतियां असीम, फंसेगा पेंच...लोस चुनाव में पिछड़ी थी BJP, इस बार कई कद्दावर तैयार

Sun, 01 Sep 2024 10:14 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अंबाला

सार

हरियाणा के अंबाला में चुनौतियां असीम हैं। लोकसभा के बाद विधानसभा चुनाव में भी पेंच फंसेगा। लोकसभा चुनाव में भाजपा शहरी हलके से पिछड़ी थी। इस बार कई कद्दावर तैयार हैं। 
विज्ञापन
Haryana Election - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अंबाला शहरी विधानसभा सीट से विधायक बने असीम गोयल को नायब सरकार में महिला एवं बाल कल्याण विभाग और परिवहन मंत्रालय की कमान तो जरूर दी लेकिन इस सीट पर भाजपा को साख बचाना चुनौती रहेगा। यह चुनौतियां राजनीतिक रूप से ही नहीं, बल्कि मतदाताओं के स्तर से भी दिख रही हैं। 
विज्ञापन


लोकसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस को बढ़त मिली थी, ऐसे में पार्टी इस सीट को हाथ से जाने नहीं देना चाहती। यही कारण है कि मंत्री असीम गोयल यहां से चुनाव लड़ते हैं तो उनको कड़ी टक्कर मिलेगी। हालांकि कांग्रेस के लिए यह राह इतनी आसान नहीं रहने वाली, एक तो चुनाव लड़ने वालों की फेहरिस्त काफी लंबी है। 

दूसरा, अब तक भाजपा व कांग्रेस दोनों ही पार्टियों का इस सीट पर दबदबा रहा है। लोगों को दोनों द्वारा किए गए वादे व दावे याद हैं, जो अभी तक पूरे नहीं हुए। जनता दोनों को ही कठघरे में खड़ा रही है। भाजपा में असीम गोयल का नाम चल रहा है। 
विज्ञापन


वहीं, आम आदमी पार्टी का दामन छोड़कर कांग्रेस में आए निर्मल सिंह भी यहां से चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। कांग्रेस से पूर्व मंत्री विनोद शर्मा भी तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में तीन-तीन कद्दावर नेताओं के चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक नजर आएगा।

समाजसेवी और कारोबारी राकेश मक्कड़ बताते हैं कि शहर में अधूरे विकास कार्य भी एक चुनौती बनते दिख रहे हैं। इसका खामियाजा लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिला था। 100 बेड का अस्पताल, नौरंगराय तालाब, महावीर पार्क, तारामंडल भवन और लघु सचिवालय जैसे बड़े विकास कार्य कहीं बजट तो कहीं कोर्ट केस होने के कारण लंबित हैं।

भाजपा : बाढ़ की समस्या से विरोध, फिर गूंज रहा आईएमटी का मुद्दा
जुलाई 2023 में अत्यधिक बारिश से अंबाला में आई बाढ़ ने लोगों को काफी नुकसान पहुंचाया। कुछ लोग आज भी मुआवजे के इंतजार में हैं। जैसे ही पटरी पर शहर आ रहा था तो इस साल हुई बारिश ने फिर से अंबाला के कई इलाकों को जलमग्न कर दिया। विपक्ष इसे मुद्दा बना रहा है।

इसी कारण भाजपा की शहरी मतदाताओं पर पकड़ अब कुछ ढीली नजर आ रही है। कांग्रेस के समय में विनोद शर्मा ने इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप यानी आईएमटी की घोषणा की थी। मगर कांग्रेस और फिर भाजपा दोनों सरकार के आने के बावजूद ये सपना पूरा नहीं हुआ। अब दोबारा से आईएमटी बनने पर रोजगार मिलने की गूंज सुनाई पड़ती है।

कांग्रेस : गुटबाजी बड़ी चुनौती
कांग्रेस में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद कुमारी सैलजा दोनों गुट चुनाव करीब आते ही काफी सक्रिय हो गए हैं। दोनों नेताओं के करीबी इतने वर्षों तक विपक्ष में रहकर विपरीत परिस्थितियों में साथ खड़े होने व वफादारी का फल मांग रहे हैं।

ऐसे में यहां टिकट के लिए चयन कांग्रेस आला कमान के लिए भी चुनौती होगी। यहां हुड्डा गुट से पूर्व मंत्री निर्मल सिंह, पूर्व विधायक जसबीर मलाैर के नाम हैं तो सैलजा गुट से अधिवक्ता रोहित जैन और चेतन चौहान प्रयास कर रहे हैं।
विज्ञापन

अधिकतर भाजपा के नाम रही सीट
1967- फकीर चंद- अखिल भारतीय जनसंघ
1968- लेखवती जैन- कांग्रेस
1972- लेखवती जैन- कांग्रेस
1977- शिव प्रसाद- जनता पार्टी
1982- शिव प्रसाद- भाजपा
1987- शिव प्रसाद- भाजपा
1991- सुमेर चंद- कांग्रेस
1996- फकीर चंद- भाजपा
2000- वीना छिब्बर- भाजपा
2005- विनोद शर्मा- कांग्रेस
2009- विनोद शर्मा- कांग्रेस
2014- असीम गोयल- भाजपा
2019- असीम गोयल- भाजपा
---------------------------
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें