नारायणगढ़ विधानसभा सीट पर इस बार पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं। कारण कि सीएम नायब सिंह सैनी का गांव मिर्जापुर माजरा इसी हलके में आता है। ऐसे में यहां कमल खिलाना भाजपा की साख का सवाल भी रहेगा। इसी कारण हाल ही में जन आशीर्वाद रैली की शुरुआत सीएम ने इसी हलके से की।
वैसे तो नारायणगढ़ सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है, मगर इनेलो और बसपा का जनाधार भी पूर्व के चुनावों में दिखता रहा है। वर्ष 2014 में मोदी लहर में नायब सिंह सैनी यहां से जीते लेकिन 2019 में कांग्रेस ने एक बार फिर कब्जा जमा लिया।
चुनावी माहौल में एक बार फिर से नारायणगढ़ सबसे अधिक चर्चा में है। कांग्रेस से मौजूदा विधायक शैली चौधरी के मैदान में उतरने की चर्चा हैं, वहीं भाजपा के चेहरे पर संशय बरकरार है। शुक्रवार को प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली साफ कर चुके हैं कि सैनी लाडवा सीट से ही लड़ेंगे।
कांग्रेस का गढ़, बसपा-इनेलो का भी रहा आधार
2019 में कांग्रेस से शैली चौधरी ने 39.56 प्रतिशत मत पाकर भाजपा के सुरेंद्र सिंह को पछाड़ा था। 2014 में नायब सिंह सैनी के सामने कांग्रेस के रामकिशन गुर्जर थे। सैनी को 39.8 प्रतिशत मत मिले थे। बसपा ने भी अच्छा प्रदर्शन किया था। बीते चुनाव में बसपा प्रत्याशी को 30,736 मत मिले थे। 2009 में इनेली के राम सिंह को भी 28,978 मत मिले थे।