अंबाला छावनी के गोविंद नगर स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में प्रवचन करते कथा व्यास। प्रवक्ता
अंबाला। गज ग्राह का युद्ध जीव और मृत्यु का युद्ध है। संसार ही सरोवर है यानी मन ही गज है और काल ही ग्राह है। यह प्रवचन मंगलवार को छावनी के गोविंद नगर स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में चित्रकूट धाम से आए आचार्य अश्विनी महाराज ने दिए।
श्रीमद्भागवत ज्ञान कथा के चतुर्थ दिवस पर उन्होंने कथा के माध्यम से गज ग्राह युद्ध के मार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस भयावह वातावरण में जब मानव शरीर का अभिमान, देह का अभिमान लेकर संसार सागर में विचरण करता है तो काल रूपी ग्राह का ग्रास बन जाता है लेकिन यदि गुरु मंत्र रूपी साधन साथ में हो तो काल की पीड़ा से दर्द में राहत मिल सकती है।
समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए आचार्य ने कहा कि मन का मंथन ही समुद्र मंथन है। समुद्र मंथन में सबसे पहले विष निकला। मन रूपी समुद्र जब-जब मथा जाएगा, सबसे पहले बुराई रूपी विष निकलेगा। लेकिन बुराई रूपी विष का पान केवल ज्ञानी ही कर सकता है, सामान्य व्यक्ति बुराई को पचा नहीं सकता। इसलिए ज्ञान रूपी शिव ही बुराई रूपी विष का पान कर सकते हैं।
इस दौरान राम जन्म और कृष्ण जन्म का बहुत ही हर्षोल्लास के साथ उत्सव मनाया गया। कथा में प्रधान दिनेश बहल, नरसिंह गोयल, अशोक सिंगला, धीरज शर्मा, राजेंद्र पाल, अमित गुप्ता, रविंदर वर्मा आदि उपस्थित रहे।
अंबाला छावनी के गोविंद नगर स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में प्रवचन करते कथा व्यास। प्रवक्ता