अंबाला सिटी। गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब में करवाए गए तीन दिवसीय गुरमत मुकाबलों का सोमवार को समापन हो गया। तीन दिवसीय समागम में हुए सभी मुकाबलों में शाहबाद से श्री गुरु नानक गर्ल्स स्कूल की टीम ने कई मुकाबलों में इनाम जीते और ओवरऑल ट्रॉफी पर कब्जा किया। सभी विजेता बच्चों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
यह मुकाबले श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज के पिता व नौंवे गुरु श्री गुरु तेग बहादुर साहिब महाराज, माता गुजर कौर, चार साहिबजादों और समूह शहीदों की शहादत की याद में करवाए गए।
इनका आयोजन ऐतिहासिक गुरुघरों में श्री गुरु हरगोबिंद साहिब सेवा सोसाइटी व हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से किया गया। ये जानकारी श्री गुरु हरगोबिंद साहिब सेवा सोसाइटी के प्रधान व एचएसजीएमसी के पूर्व कार्यकारी सदस्य टीपी सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि एचएसजीएमसी अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि गुरुओं की शिक्षाओं का प्रचार करने के लिए ऐसे गुरमत मुकाबलों का आयोजन बहुत जरूरी है। उन्होंने इस समागम के आयोजन के लिए श्री गुरु हरगोबिंद साहिब सेवा सोसाइटी व समस्त संगत की हौंसला अफजाई की। विशेष तौर पर पहुंचे फिल्मी अदाकार अमृतपाल सिंह ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी बच्चों की सराहना की। तीन दिन तक चले मुकाबलों में कई स्कूलों ने हिस्सा लिया। टीपी सिंह ने बताया कि सोमवार को गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब में शहीदों से संबंधित विषय पर जिला स्तरीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता करवाई गई। इसके बाद अवॉर्ड चंगेरे मापे प्रतियोगिता में अमृतधारी माता-पिता अपने 5 से 7 साल के बच्चों को सिखी स्वरूप में तैयार करके लाए। सिखी सरुप मेरा असली रूप प्रतियोगिता, मॉडल मेकिंग प्रतियोगिता, दस्तार व दुमाला मुकाबला और गतके का प्रदर्शन भी किया गया। इस दौरान सोसाइटी की तरफ से सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
समागम में हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा विशेष तौर पर उपस्थित रहे। एचएसजीएमसी सदस्य रुपिंद्र सिंह गुरुद्वारा पंजोखरा साहिब, पूर्व एचएसजीएमसी वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुदर्शन सिंह सहगल, अमृतपाल सिंह, गुरप्रीत सिंह खालसा, नरिंद्र सिंह, ज्ञानी हरसिमरन सिंह, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब सेवा सोसायटी के चेयरमैन मनजीत सिंह, बीएम सिंह, एचएसजीएमसी सदस्य गुरतेज सिंह, मैनेजर प्रीतपाल सिंह, गतका कोच इंद्रपाल सिंह खालसा सहित अन्य मौजूद रहे। संवाद