- कई मिलों पर 30 हजार क्विंटल से ज्यादा सीएमआर बकाया, 30 जून तक कुल आवंटित धान का 67 प्रतिशत सीएमआर जमा करने का था लक्ष्य
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। धान खरीद सीजन 2025-26 के तहत सरकार को कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) उपलब्ध कराने में जिले की कई राइस मिलें अभी भी निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे चल रही हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की 29 जून तक की मिलवार समीक्षा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिले की राइस मिलों के पास सरकार का 17.54 लाख क्विंटल सीएमआर अभी भी बकाया है। अगर औसतन 3,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हिसाब लगाया जाए तो यह चावल करीब 614 करोड़ रुपये का बनता है।
रिपोर्ट के अनुसार जिले की 152 राइस मिलों को 68.81 लाख क्विंटल धान मिलिंग के लिए आवंटित किया गया था। विभाग ने 29 जून तक 46.10 लाख क्विंटल सीएमआर जमा कराने का लक्ष्य तय किया था लेकिन अब तक केवल 28.56 लाख क्विंटल चावल ही सरकारी एजेंसियों को दिया जा सका। यानी लक्ष्य के मुकाबले 17.54 लाख क्विंटल चावल अभी भी जमा होना बाकी है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार चावल की ढुलाई के लिए निर्धारित 15,904 वैगनों के मुकाबले केवल 9,877 वैगन ही भेजे जा सके हैं, जबकि करीब 6,060 वैगनों के बराबर चावल अभी भी सरकारी गोदामों तक नहीं पहुंचा है।
मिल-वार रिपोर्ट में कई ऐसी राइस मिलें सामने आई हैं, जिन पर सरकार का 9 से 11 करोड़ रुपये मूल्य का सीएमआर बकाया है। सबसे अधिक बकाया एसआर एग्रो इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड तरावड़ी पर दर्ज किया गया है। इस मिल को अभी 32,462.93 क्विंटल सीएमआर जमा करना है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 11.36 करोड़ रुपये है। इसके बाद साई कृपा एग्रोटेक, घरौंडा पर 31,998.07 क्विंटल (करीब 11.20 करोड़ रुपये) का सीएमआर बकाया है। सतभोग ओवरसीज, असंध पर 30,085.17 क्विंटल (करीब 10.53 करोड़ रुपये) और एमएस फूड्स, कुंजपुरा पर 30,077.32 क्विंटल (करीब 10.53 करोड़ रुपये) चावल अभी जमा होना बाकी है।
इसी प्रकार समृद्धि एग्रो फूड्स, करनाल पर 29,586.80 क्विंटल (करीब 10.36 करोड़ रुपये), लॉर्ड कृष्णा राइस मिल, घरौंडा पर 29,458.31 क्विंटल (करीब 10.31 करोड़ रुपये) और भगवती एग्रो फूड इंडस्ट्रीज, करनाल पर 29,217.12 क्विंटल (करीब 10.23 करोड़ रुपये) का सीएमआर बकाया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि श्री श्याम जी फूड्स, घीर, ओम राइस एंड जनरल मिल्स, घरौंडा और जेपीएस ग्लोबल, असंध समेत कई मिलों पर भी 26 से 28 हजार क्विंटल तक चावल जमा होना बाकी है। इन मिलों पर भी 9 से 10 करोड़ रुपये मूल्य का सीएमआर बकाया है।
नियमित समीक्षा की गई तेज
सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सरकारी भंडारण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए सीएमआर की समय पर आपूर्ति बेहद जरूरी है। इसी कारण अब मिलवार निगरानी, वैगन डिस्पैच और बकाया सीएमआर की नियमित समीक्षा तेज कर दी गई है। सरकार का करीब 614 करोड़ रुपये मूल्य का चावल अभी भी राइस मिलों के पास फंसा होने के कारण विभाग इस पूरे मामले को गंभीरता से लेकर लगातार निगरानी कर रहा है।
वाजिब वजह पर मिलेगा समय वरना होगी कार्रवाई
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग नियंत्रक मुकेश कुमार के अनुसार सभी राइस मिलों की प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है। जिन मिलों की प्रगति निर्धारित लक्ष्य से कम है, उन्हें बकाया सीएमआर जल्द जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर भौतिक सत्यापन भी कराया जा रहा है। वाजिब कारण मिलने पर उनको चावल लौटने के लिए अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। अगर इसके बावजूद भी मिलें समय पर चावल जमा नहीं करती हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।