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Ambala News: हजारों कब्जाधारियों की पैरवी करेगी सरकार

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अंबाला सदर क्षेत्र की आबादी, जहां नगर परिषद द्वारा नोटिस दिए जा रहे हैं। संवाद - फोटो : यूपीएस का विरोध जता प्रतियां जलाते पदा​धिकारी।
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अंबाला। ड्रोन सर्वे के दौरान सदर क्षेत्र की अवैध घोषित की गई 6469 संपत्तियों की पैरवी हरियाणा सरकार करेगी। निकाय मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान यह फैसला किया। निकाय विभाग ने इस मामले को सुलझाने के लिए रेगुलराइजेशन पॉलिसी बनाने का फैसला किया है, जिससे कि लोगों को राहत मिल सके।
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बैठक के दौरान पॉलिसी तैयार करने से पहले कब्जाधारियों की वास्तविक रूपरेखा तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके लिए नगर परिषद कार्यवाही में जुट गई है। सदर क्षेत्र में अवैध घोषित की गई संपत्तियों को लेकर टीमें वार्ड स्तर पर जाकर आंकलन करेंगी। इस दौरान टीमें यह देखेंगी कि संपत्ति धारक के पास असल में कितनी जमीन है और उसने कितनी जमीन पर कब्जा किया हुआ है। इसके बाद रिपोर्ट मुख्यालय स्तर पर प्रस्तुत की जाएगी। इसके आधार पर हाईकोर्ट में निकाय विभाग अपना जवाब दायर करेगी, जिससे कि तथ्यों के आधार पर अवैध संपत्ति पर नियमानुसार कार्रवाई हो सके।
संपत्ति धारकों को दिए जा चुके नोटिस
हाईकोर्ट में जमा करवाई गई ड्रोन सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर अंबाला छावनी के सदर क्षेत्र में रहने वाले 6469 संपत्ति धारकों को नोटिस दिए जा रहे हैं, जिससे कि वो अपने दस्तावेजों को सही समय पर नगर परिषद के कार्यालय में जमा करवा सकें ताकि इसके आधार पर आगामी प्रक्रिया को शुरू किया जा सके। ऐसे में संपत्ति धारकों की टेंशन बढ़ गई है। इस मामले के लिए हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने नप अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखें, जिससे कि किसी का कोई नुकसान न हो।
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राजस्व सचिव ने मांगा था हाईकोर्ट से समय


हाईकोर्ट में 11 दिसंबर को अतिक्रमण के खिलाफ सुनवाई हुई थी। हरियाणा सरकार के राजस्व सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से हाईकोर्ट को जानकारी देकर समय मांगा था। सुनवाई के दौरान राजस्व विभाग के सचिव ने बताया था कि इस मुद्दे को लेकर संयुक्त कमेटी गठित की गई है जोकि आगामी सुनवाई से पहले अपनी रिपोर्ट जमा कराएगी। हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले संयुक्त कमेटी ने फैसले की जानकारी सरकार को दी है ताकि मामले की जनहित में पुरजोर पैरवी की जा सके।

दिए जा रहे नोटिस
यह मामला वर्ष 1999 से संबंधित है और इस मामले की सुनवाई चल रही है। जबकि प्रतिवादी के वकील ने तर्क दिया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई काफी धीमी चल रही है, इसलिए मामला बार-बार स्थगित हो रहा है। वहीं, दूसरी तरफ अभी भी नगर परिषद की ओर से अतिक्रमण करने वाले लोगों को नोटिस देने का काम किया जा रहा है।
यह है पूरा मामला

वर्ष 1977 में भारत सरकार की ओर से अंबाला छावनी में कुल 1066 एकड़ भूमि को अंबाला कैंटोनमेंट से हटा कर हरियाणा सरकार और नगर परिषद अंबाला सदर को भूमि स्थानांतरित की गई थी। उक्त भूमि में से काफी भूमि लोगों को रहने के लिए ओल्ड ग्रांट व लीज ग्रांट पर दी गई थी। इस पर समय बीतने के साथ-साथ काफी लोगों ने उपरोक्त के अतिरिक्त खाली भूमि पर भवन बना कर स्थायी कब्जा कर लिया।
वर्जन
हाईकोर्ट में लंबित मुद्दे को लेकर मुख्यालय स्तर पर मंत्रणा हुई है ताकि कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखा जा सके। इसके तहत कुछ प्रस्ताव तैयार किए गए हैं जोकि कोर्ट के समक्ष पेश किए जाएंगे, जिससे कि लोगों को राहत मिल सके।
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रविंद्र कुहाड़, कार्यकारी अधिकारी नप सदर।
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