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रंगमंच को सरकार विश्वविद्यालयों में करे शामिल: ओम शर्मा

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अंबाला। रंगमंच के कलाकार समाज की कुरीतियों को थिएटर के माध्यम से लोगों के बीच पहुंचाता है। इन कलाकारों को समाज में अपनी बनाने में सबसे ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
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अधिकतर रंगमंच के कलाकारों को वह मुकाम नहीं मिलता, जिसके वह हकदार होते हैं। सफलता नहीं मिलने पर कई बार थिएटर के कलकार गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं। कई बार इन्हें सरकार की ओर से भी कोई संरक्षण नहीं मिलता। इस कारण कई थियेटर बंद हो जाते हैं। अब रंगमंच के कलाकारों की मांग है कि रंगमंच को सरकार विश्वविद्यालयों में कोर्स के रूप में शामिल करे। इसके बाद ही इस कला को बचाए रखने में मदद मिल सकेगी।
रंगमंच को सरकार से नहीं मिलता संरक्षण
रंगमंच के कलाकारों को समाज में बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मंथन थियेटर ग्रुप के निदेशक ओम शर्मा ने बताया कि वह 2005 से थिएटर से जुडे़ हुए हैं। सरकार की और से थिएटर को संरक्षण नहीं मिलता, जिसके कारण कई थिएटर शुरू होने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। हरियाणा में किसी की यूनिवर्सिटी में थियेटर से संबंधित कोर्स नहीं कराया जाता। जबकि राजस्थान और अन्य राज्यों में करवाया जाता है। इसलिए हरियाणा को इसे अपने कोर्स में शामिल किया जाए। इसके अलावा युवाओं की एमबीए, बीबीए की तरफ स्किल डेवलपमेंट पर ट्रेनिंग होती है उसी प्रकार थिएटर में भी युवाओं की ट्रेनिंग करवानी चाहिए।
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थिएटर पैसे से नहीं जुनून से होता है।
ग्रुप के सचिव भारत सोपोरी ने बताया कि थिएटर पैसे से नहीं जुनून से होता है। उनके थिएटर से निकले कलाकार राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे हैं। वह सोनी से लेकर सब टीवी आदि पर सीरियल में काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वह अंबाला से एफएम 90 सामुदायिक रेडियो चलाते हैं। सुबह छह बजे से लेकर रात नौ बजे तक इस पर कार्यक्रम आयोजित होते हैं। उनका थिएटर 11 साल पुराना है और मौजूदा समय में उनके थिएटर से आठ लोग जुडे़ हुए है। सरकार की और से समय समय पर कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता रहता है।
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