संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी के रामबाग गोशाला में दिव्या श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन श्राद्ध पक्ष में किया जा रहा है। कथा के चतुर्थ दिवस में सतगुरु देव देशमुख वशिष्ठ महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग व उनके जन्म लेने के गूढ़ रहस्यों को बेहद संजीदगी के साथ सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान को न धन, पद व प्रतिष्ठा से नहीं बांका जा सकता। भगवान तो प्रेम से बंध जाते हैं। भगवान से प्रेम करो तो वो प्रेम तुम्हें बदल देगा।
कथा व्यास ने बताया कि जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए।
भगवान श्रीकृष्ण गोकुल में नित्य ही माखन चोरी लीला करते हैं। मां यशोदा के बार-बार समझाने पर भी श्रीकृष्ण नहीं मानते हैं तो मां यशोदा ने भगवान को रस्सी से बांधना चाहा, पर भगवान को कौन बांध सकता है, लेकिन भगवान मां की दयनीय दशा को देखते हुए स्वयं बंध जाते हैं। एक प्रेरक और आध्यात्मिक विचार है जो बताता है कि सच्ची भक्ति और प्रेम से भगवान भक्त को अपने जैसा बना लेते हैं और उनके जीवन को आनंदमय व पूर्ण बनाते हैं। कथा के प्रारंभ में श्री भागवत भगवान का पूजन कर आरती उतारी गई। महाराज ने भागवत भजन के द्वारा माहौल को भागवत मय एवं भक्ति मय बना दिया। कथा सुनने के लिए आस-पास के लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
अंबाला छावनी के रामबाग स्थित गौशाला में कार्यक्रम के दौरान कथाव्यास का आशीर्वाद लेते दंपति। प्- फोटो : mathura
अंबाला छावनी के रामबाग स्थित गौशाला में कार्यक्रम के दौरान कथाव्यास का आशीर्वाद लेते दंपति। प्- फोटो : mathura